गढ़वा| शांति निवास हाई स्कूल के स्वर्ण जयंती समारोह में उस वक्त पूरा सभागार भावनाओं के सागर में डूब गया। जब नन्हे-मुन्ने बच्चों ने पेड़ों की पीड़ा को बचाने के लिए अपनी सजीव प्रस्तुति को मंच पर उतारा। ना काटो मुझे, दुखता है… गीत की करुण पुकार जैसे ही वातावरण में गूंजी, ऐसा प्रतीत हुआ मानो स्वयं प्रकृति ने मनुष्य से अपनी रक्षा की गुहार लगा रही हो। बच्चों ने पेड़ों का रूप धारण कर उनकी मौन वेदना, उनकी विवशता और मानव जीवन के लिए उनके महत्व को इतने मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया कि मंच के सामने बैठे अतिथि और दर्शक भावुक हो उठे। प्रस्तुति के अंतिम दृश्य में जब पेड़ कटने की पीड़ा को अभिनय के माध्यम से दिखाया गया तो कई लोगों की आंखें नम हो गईं और पूरा परिसर देर तक तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा।


