आप खेती-किसानी से जुड़े किस विषय पर जानकारी चाहते हैं, वॉट्सएप नंबर 7 9 9233 7144 पर सिर्फ मैसेज करें। भास्कर न्यूज |जामताड़ा जिले की जलवायु और हल्की दोमट भूमि तरबूज की खेती के लिए अत्यंत उपयुक्त मानी जाती है। यदि किसान वैज्ञानिक विधि अपनाकर तरबूज की खेती करें तो कम समय में अच्छी उपज प्राप्त कर बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं। उक्त बातें जामताड़ा के जिला कृषि पदाधिकारी लव कुमार ने कही। उन्होंने बताया कि तरबूज गर्म मौसम की फसल है, जिसकी बुवाई जनवरी के अंत से मार्च माह तक करना लाभकारी रहता है। नदी किनारे की बलुई दोमट भूमि अथवा अच्छी जल निकासी वाली खेत तरबूज की खेती के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है। खेत की तैयारी के समय 2–3 बार जुताई कर मिट्टी को भुरभुरी बना लें तथा प्रति एकड़ 8 से 10 टन सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाना चाहिए। जिला कृषि पदाधिकारी ने किसानों को सलाह दी कि उन्नत किस्मों के शुद्ध एवं प्रमाणित बीजों का चयन करें। बीज की बुवाई 2–3 सेंटीमीटर गहराई पर 2 से 2.5 मीटर की दूरी पर क्यारियों में करें। प्रति हेक्टेयर 2.4 से 4 किलोग्राम बीज पर्याप्त होता है। बीज उपचार ट्राइकोडर्मा विरिडी या कार्बेन्डाजिम से अवश्य करें, जिससे प्रारंभिक रोगों से फसल को बचाया जा सके।


