भास्कर न्यूज | जामताड़ा सदर प्रखंड अंतर्गत कुसमापहाड़ी में मधुमक्खी पालन पर आयोजित सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन शुक्रवार को हुआ। यह प्रशिक्षण आत्मा एवं आशा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया, जिसमें किसानों को वैज्ञानिक विधि से मधुमक्खी पालन कर अतिरिक्त आय अर्जित करने के व्यावहारिक उपाय बताए गए। रांची से आए प्रशिक्षक बेलिया बेदिया ने किसानों को बताया कि क्षेत्र के विभिन्न गांवों में सरसों की खेती बड़े पैमाने पर होती है, जो मधुमक्खी पालन के लिए अत्यंत अनुकूल है। शहद उत्पादन के साथ-साथ फसलों के परागण में भी वृद्धि होती है। प्रशिक्षक मंजूर आलम ने मधुमक्खियों की विभिन्न प्रजातियों, उनके रहन-सहन, भोजन और प्रबंधन पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मधुमक्खी पालन बागवानी फसलों के लिए अत्यंत लाभकारी है, वहीं बागवानी फसलें मधुमक्खियों के लिए प्रमुख भोजन स्रोत का कार्य करती है जिससे दोनों का परस्पर लाभ सुनिश्चित होता है। समापन सत्र में कृषि पदाधिकारी लव कुमार ने कहा कि किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ सहायक कृषि गतिविधियों को अपनाकर अपनी आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं। मधुमक्खियों के परागण से तिलहनी फसलों की उपज में 15 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि संभव है। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागी किसानों को प्रशिक्षण किट (बैग, पेन आदि) प्रदान किया। कार्यक्रम के अंतिम दिन सभी कृषकों को प्रशिक्षण प्रमाण पत्र के साथ-साथ मधुमक्खी कैप और दस्ताने भी निःशुल्क वितरित किया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में मंजूर आलम, अभिषेक पांडे और शबाना कासमी के सहयोग से कुल 25 कृषकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। कार्यक्रम के सफल आयोजन पर किसानों ने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रशिक्षण से उन्हें स्वरोजगार और आयवृद्धि के नए अवसर प्राप्त होंगे।


