न्यूनतम तापमान में आया उछाल:बारिश को लेकर 17-18 फरवरी के लिए येलो अलर्ट जारी, कृषि विभाग ने भी की एडवाइजरी जारी

चित्तौड़गढ़ में एक बार फिर मौसम ने अचानक करवट ले ली है। पिछले 24 घंटे में न्यूनतम तापमान में एक साथ चार डिग्री की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे रात के समय ठंड में काफी कमी महसूस की गई। हालांकि मंगलवार सुबह से धूप और बादलों की लुकाछिपी जारी है। कभी तेज धूप निकल रही है तो कभी बादल छा जा रहे हैं। सुबह से हल्की हवा भी चल रही है, जिससे गर्मी का असर कुछ कम महसूस हो रहा है। मौसम विभाग ने मंगलवार और बुधवार के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। विभाग का कहना है कि इन दो दिनों में बादल छाए रह सकते हैं और हल्की बारिश होने की संभावना है। तापमान में लगातार उतार-चढ़ाव, रात का पारा बढ़ा शहर में इन दिनों तापमान में लगातार बदलाव देखा जा रहा है। अधिकतम और न्यूनतम तापमान दोनों में अंतर बना हुआ है। पिछले 24 घंटे में अधिकतम तापमान में 0.4 डिग्री की हल्की बढ़ोतरी हुई है, जबकि न्यूनतम तापमान में चार डिग्री का बड़ा उछाल दर्ज किया गया है। अब न्यूनतम तापमान 15 डिग्री तक पहुंच चुका है। सोमवार को अधिकतम तापमान 33 डिग्री और न्यूनतम तापमान 16.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। वहीं रविवार को अधिकतम तापमान 32.6 डिग्री और न्यूनतम तापमान 12.4 डिग्री सेल्सियस था। इससे साफ है कि रात का तापमान तेजी से बढ़ा है, जिससे ठंड में कमी आई है। दिन में तेज गर्मी और रात में पहले से कम ठंड का असर महसूस किया जा रहा है। वेस्टर्न डिस्टरबेंस रहेगा सक्रिय, बारिश के आसार मौसम विभाग के अनुसार एक नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय हो रहा है, जिसका असर 17 और 18 फरवरी को देखने को मिल सकता है। 17 फरवरी को आसमान में बादल छाए रहेंगे और मेघ गर्जन के साथ हल्की बारिश हो सकती है। वहीं 18 फरवरी को इसका असर और ज्यादा रहेगा। इस दिन तेज हवाएं चलने के साथ बारिश होने की संभावना जताई गई है। विभाग ने लोगों को मौसम में अचानक बदलाव को देखते हुए सावधानी बरतने की सलाह दी है। कृषि विभाग की एडवाइजरी, फसलों को सुरक्षित रखने की सलाह मौसम में संभावित बदलाव को देखते हुए कृषि विभाग ने भी एडवाइजरी जारी की है। विभाग ने किसानों से कहा है कि जो रबी की फसल पककर तैयार हो गई है, उसे जल्द से जल्द सुरक्षित स्थान पर रख लें। खुले में रखी फसल बारिश और तेज हवा से खराब हो सकती है। कृषि मंडियों और अनाज मंडियों में भी जो फसल खुले आसमान के नीचे रखी है, उसे ढकने या सुरक्षित करने की व्यवस्था कर ली जाए। विभाग का कहना है कि समय रहते सावधानी बरतने से नुकसान से बचा जा सकता है।

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