भोजपुर महोत्सव का दूसरा दिन:महालक्ष्मी अय्यर के सुरों से गूंजा शिव मंदिर परिसर; कथक और लोकगायन ने बांधा समां

विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक भोजपुर शिव मंदिर में आयोजित तीन दिवसीय ‘महादेव’ भोजपुर महोत्सव के दूसरे दिन सुर और ताल का अनूठा संगम देखने को मिला। मध्यप्रदेश संस्कृति विभाग और जिला प्रशासन के इस भव्य आयोजन में महाशिवरात्रि के उल्लास के बीच बड़ी संख्या में श्रद्धालु और संगीत प्रेमी पहुंचे। बघेली लोकगायन से शिव महिमा का गुणगान महोत्सव के दूसरे दिन की शुरुआत भोपाल की शीला त्रिपाठी और उनके साथियों के बघेली लोकगायन से हुई। कलाकारों ने ‘मोरे अंगना मा आये भोलेनाथ’ और ‘चली भोले की बरतिया’ जैसे पारंपरिक बघेली गीतों के जरिए भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह प्रसंगों को बेहद खूबसूरती से पेश किया। शिव-गौरा के गीतों ने पूरे माहौल को भक्तिमय कर दिया। कथक के जरिए जीवंत हुई अर्धनारीश्वर कथा अगली प्रस्तुति में भोपाल की आकृति जैन और उनके समूह ने कथक नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी। नृत्यनाटिका के माध्यम से कलाकारों ने अर्धनारीश्वर रूप, शिव-सती प्रसंग, दक्ष यज्ञ और शिव तांडव स्तोत्रम का चित्रण किया। शास्त्रीय नृत्य की इस प्रस्तुति ने दर्शकों को अध्यात्म और कला के अद्भुत संगम से रूबरू कराया। महालक्ष्मी अय्यर के भजनों पर झूमे दर्शक महोत्सव की शाम मुंबई की सुप्रसिद्ध पार्श्व गायिका महालक्ष्मी अय्यर के नाम रही। उन्होंने ‘शिव कैलाशों के वासी’, ‘नमो नमो शंकरा’ और ‘बम लहरी’ जैसे लोकप्रिय भजनों की शानदार प्रस्तुति दी। उनके सुगम संगीत और शिव स्तुति ने मंदिर परिसर में ऊर्जा भर दी, जिस पर दर्शक झूमने को मजबूर हो गए। कार्यक्रम में संस्कृति विभाग की उप संचालक डॉ. पूजा शुक्ला और मंदिर के महंत पवन गिरी महाराज ने कलाकारों का सम्मान किया। देखें तस्वीरें…

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