कस्टम हायरिंग केंद्रों के नए नियम लागू:किसानों को 30 लाख तक अनुदान, ड्रोन सेवाओं को बढ़ावा

राजस्थान कृषि आयुक्तालय ने वर्ष 2025-26 के लिए कस्टम हायरिंग केंद्रों की स्थापना संबंधी दिशा-निर्देशों में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। इन संशोधनों का उद्देश्य कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देना, किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र आसान दरों पर उपलब्ध कराना और ग्रामीण स्तर पर मशीन सेवाओं का विस्तार करना है। इससे खेती की लागत कम होगी और किसानों की आय बढ़ेगी। नए नियमों के अनुसार, अब किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), स्वयं सहायता समूह, सहकारी संस्थाएं, ग्रामीण उद्यमी, युवा और प्रगतिशील किसान कस्टम हायरिंग केंद्र स्थापित कर सकेंगे। इन केंद्रों की 30 लाख रुपए तक की परियोजना लागत पर निर्धारित शर्तों के साथ अनुदान प्रदान किया जाएगा। सहकारिता विभाग और राजीविका के माध्यम से स्थापित होने वाले केंद्रों को भी वित्तीय सहायता मिलेगी। आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। इच्छुक किसान संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार), जिला परिषद डीडवाना के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। केंद्रों में खरीदे गए प्रमुख कृषि यंत्रों और एक लाख रुपए से ज्यादा कीमत के स्वचालित उपकरणों पर टेलीमेटिक्स किट लगाना अनिवार्य होगा। सभी सेवाओं की बुकिंग राज्य स्तरीय कस्टम हायरिंग ऐप के जरिए होगी, जिससे पारदर्शिता और डिजिटल निगरानी सुनिश्चित की जा सकेगी। ड्रोन कस्टम हायरिंग केंद्रों के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। इनमें ड्रोन और उसके उपकरणों पर निर्धारित सीमा तक अनुदान दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, कृषि अवसंरचना निधि के तहत निजी क्षेत्र और सेवा प्रदाताओं को भी प्रोत्साहन मिलेगा। चयनित आदर्श गांवों में केंद्र स्थापित कर छोटे और सीमांत किसानों को रियायती दरों पर मशीन सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। प्रदर्शन कार्यों में उपयोग की गई मशीनों को आसपास के किसानों को किराए पर देने की अनुमति होगी। सभी केंद्रों का मूल्यांकन डिजिटल डेटा, जियो-टैगिंग और नियमित निगरानी के आधार पर किया जाएगा।

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