महज 20-25 दिन की एक आवाज का शृंगार कर उसे कलयुगी मां मरने के लिए जंगल में लावारिश हालत में छोड़कर चली गई थी। गनीमत रही कि समय रहते एक किसान की नजर उस पर पड़ी और बच्ची को हॉस्पिटल पहुंचाया गया। जिसे 18 फरवरी को छुट्टी देकर बाल कल्याण समिति को सौंपा। जहां आगे बच्ची को नियमानुसार किसी निसंतान दम्पत्ति को गोद देने की कार्रवाई की जाएगी।
बांगड़ हॉस्पिटल के डॉ चंद्रवीर परिहार ने बताया कि 12 फरवरी को बच्ची को उपचार के लिए बांगड़ हॉस्पिटल लाया गया था। डॉक्टर आरके विश्नोई की देखरेख में उपचार शुरू किया गया। बच्ची को जब लाए थे उस समय उसका वजन 2 किलो 90 ग्राम था। उसकी आवश्यक जांच करवाई ओर हॉस्पिटल में भर्ती रहने के दौरान उसे ऊपर का दूध पिलाया। पूर्ण रूप से स्वस्थ होने पर उसे 18 फरवरी को डिस्चार्ज कर बाल कल्याण समिति को सौंपा। छुट्टी देते समय बच्ची का वजन तीन किलो था। वह करीब 15-20 दिन की थी। उसे जब छुट्टी दी तो कई महिला स्टॉफ की आंखें नम हो गई। यह भी पढ़े : *श्रृंगार कर बच्ची को कंटीली झाड़ियों में छोड़ा:* काजल लगाया, बाल बनाए और अच्छे कपड़े पहनाए; किसान को सुनाई दी रोने की आवाज


