झालावाड़ में राजकीय आयुर्वेद औषधालय एक छत पर वरिष्ठ चिकित्साधिकारी डॉ. रिंकेश कुमार यादवेंद्र ने अस्पताल आने वाले रोगियों को विटामिन बी12 की कमी के बारे में जागरूक किया। उन्होंने बताया कि जांच में अक्सर इस विटामिन की कमी पाई जाती है, खासकर शाकाहारी लोगों में। डॉ. यादवेंद्र ने विटामिन बी12 को “नसों और रक्त का रक्षक” बताया। उन्होंने कहा कि आज के समय में थकान, चक्कर आना, याददाश्त कमजोर होना और शरीर में झनझनाहट जैसी समस्याओं के पीछे अक्सर विटामिन बी12 की कमी ही मुख्य कारण होती है। भारत में शाकाहारी आबादी में इसकी कमी सबसे अधिक देखी जाती है। भोजन या सप्लीमेंट से मिलता है विटामिन बी12
विटामिन बी12 एक पानी में घुलनशील विटामिन है, जिसे कोबालामिन भी कहते हैं। शरीर इसे स्वयं नहीं बनाता, बल्कि यह भोजन या सप्लीमेंट से ही प्राप्त होता है। यह डीएनए के निर्माण, लाल रक्त कोशिकाओं (आरबीसी) के बनने और तंत्रिका तंत्र के सही कामकाज के लिए अत्यंत आवश्यक है। पूरे तंत्रिका तंत्र के लिए है जरूरी
शरीर में विटामिन बी12 का महत्व केवल रक्त के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे तंत्रिका तंत्र के लिए भी है। यह नसों की मायलिन शीथ को सुरक्षित रखता है, मस्तिष्क तक ऑक्सीजन पहुंचाने वाली आरबीसी के निर्माण में मदद करता है। साथ ही, यह हार्मोन संतुलन और मूड स्थिरता में भी योगदान देता है, जिससे थकान, डिप्रेशन और ब्रेन फॉग जैसी समस्याएं कम होती हैं। आयुर्वेद में इसे मज्जा धातु पोषक तत्व के रूप में देखा जाता है। कमी से शरीद हो जाता है कमजोर
विटामिन बी12 की कमी धीरे-धीरे शरीर को अंदर से कमजोर करती है। इसके लक्षणों में लगातार थकान और कमजोरी, हाथ-पैरों में झनझनाहट या सुन्नपन, याददाश्त कमजोर होना, चक्कर आना, सांस फूलना, जीभ में जलन और मुंह के छाले शामिल हैं। लंबे समय तक इसकी कमी रहने पर नसों को स्थायी नुकसान भी हो सकता है। शाकाहारी लोगों के लिए विटामिन बी12 के स्रोत
विटामिन बी12 मुख्यतः एनिमल फूड्स में पाया जाता है, लेकिन कुछ शाकाहारी विकल्प भी उपलब्ध हैं: इसमें दूध और दही – सीमित मात्रा में, पनीर, फोर्टिफाइड अनाज और सोया मिल्क, मक्खन (सीमित मात्रा) फोर्टिफाइड न्यूट्रिशनल यीस्ट, वयस्क व्यक्ति को औसतन 2.4 माइक्रोग्राम प्रतिदिन विटामिन B12 की आवश्यकता होती है।
गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को थोड़ी अधिक मात्रा चाहिए। आयुर्वेद के अनुसार B12 की कमी अग्नि मंदता और धातु क्षय से जुड़ी होती है। सही पाचन, गुनगुना दूध, और समय पर भोजन बी12 के अवशोषण में मदद करता है। सिर्फ खाने से नहीं, एब्जॉर्प्शन प्रॉब्लम से भी कमी होती है
उम्र बढ़ने के साथ B12 का अवशोषण कम हो जाता है, एसिडिटी की दवाएं लंबे समय तक लेने से B12 घट सकता है, लोग नियमित रूप से फोर्टिफाइड फूड लें, जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट लें, पाचन को मजबूत रखें


