बड़वानी जिले में एक प्राथमिक विद्यालय पशुबाड़े में संचालित हो रहा है। यहां करीब 40 आदिवासी बच्चे गाय, बकरी और मुर्गियों के बीच गंदगी और बदबूदार माहौल में शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं। यह स्कूल जिला मुख्यालय से लगभग 60 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत चेरवी के डुलारा फलिया में स्थित है। एक ओर जहां बच्चे पढ़ाई करते हैं, वहीं दूसरी ओर पशु बंधे रहते हैं और मुर्गियां उनके आसपास घूमती रहती हैं। मध्य प्रदेश सरकार बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए सीएम राइज और पीएमश्री जैसे कई स्कूल चला रही है, लेकिन इस ‘तबेला स्कूल’ की स्थिति चिंताजनक है। ग्रामीणों के अनुसार, गांव में स्कूल का भवन अधूरा पड़ा है। इसमें न तो छत है और न ही दरवाजे लगे हैं। इस अधूरे भवन के कारण बच्चों को मजबूरी में पशुबाड़े में बैठकर पढ़ना पड़ रहा है। गांव के लोगों ने कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से स्कूल भवन को पूरा करने की मांग की है, लेकिन उनकी शिकायत पर अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। बारिश में और बढ़ जाती है समस्या ग्रामीण आकाश वर्मा ने बताया कि बारिश के दिनों में बच्चों को और भी अधिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है, क्योंकि पानी टपकने से पढ़ाई बाधित होती है। बच्चों के माता-पिता का कहना है कि गांव में एक अच्छी स्कूल होनी चाहिए, लेकिन उनकी बात कोई सुनने को तैयार नहीं है। वे सरकार और शिक्षा विभाग से बेहतर व्यवस्थाओं की मांग कर रहे हैं। लेकिन एक पक्का स्कूल भवन अब तक नहीं बनाया जा सका, जिसमें बैठकर हमारे बच्चे पढ़ सकें। शिक्षा विभाग ने छात की जगह बरसाती दी जनपद सदस्य प्रतिनिधि कैलेश खरते ने बताया मेरे द्वारा जनपद की सामान्य सभा की बैठक में इस स्कूल का मामला उठाया था। तब जाकर शिक्षा विभाग ने छत की जगह प्लास्टिक कि बरसाती से स्कूल को ढकी थी। लेकिन बारिश के समय बरसाती पूरी तरीके से फट गई और फिर बिना छत की पुरानी जैसी स्थिति हो गई। कई बार जन शिक्षकों को भी अवगत कराया लेकिन उन्होंने कहा ठीक कर देंगे ठीक कर देंगे लेकिन अभी तक स्थिति जैसी की वैसी है। अधिकारी बोले- सिर्फ छत डालना बाकी है पाटी बीआरसी दिनेश चौहान ने बताया कि यह स्कूल एक मकान में संचालित हो रही है। वहां की स्कूल बनी हुई है। सिर्फ छत डालना बाकी है। इसका पंचायत की तरफ से कुछ केश चल रहा है। इसके बारे में उच्च अधिकारियों को प्रस्ताव बनाकर भेजा है।


