भास्कर न्यूज | राजनांदगांव शौर्य और त्याग की मूर्ति छत्रपति शिवाजी महाराज के जन्म दिवस अवसर पर राष्ट्रीय गौरव यात्रा का आयोजन किया जा रहा है। यह यात्रा 14 फरवरी को सिंघ मेंड महाराष्ट्र से निकल कर 16 फरवरी को छत्तीसगढ़ पहुंची। यात्रा का छत्तीसगढ़ प्रवेश के दौरान जिले के महाराष्ट्र सीमावर्ती पाटेकोहरा में समाज द्वारा स्वागत किया गया। राजनांदगांव शहर के शिवाजी पार्क में राष्ट्रीय गौरव यात्रा के स्वागत कार्यक्रम में सर्व समाज के लोगों द्वारा यात्रा का स्वागत किया गया। राष्ट्रीय गौरव यात्रा का स्वागत करने छत्रपति शिवाजी पार्क में लगी छत्रपति शिवाजी महाराज की मूर्ति और पार्क की सफाई की गई। प्रतिमा पर माल्यार्पण कर विशाल पंडाल में लोगों के बैठने का इंतजाम किया गया। शिवाजी पार्क को भगवा ध्वजों से सजाया गया। शाम को एक विशाल ट्रेलर में घोड़े पर सवार छत्रपति शिवाजी महाराज की झांकी स्वरूप विशाल प्रतिमा का 50 से ज्यादा वाहनों के काफिले के साथ आगमन हुआ। यात्रा का स्वागत करते हुए देश और स्वराज के लिए छत्रपति शिवाजी महाराज की वीरता और बलिदान को याद किया गया। उनके संघर्ष को भुलाया नहीं जा सकता: देशमुख जिला कुर्मी क्षत्रिय समाज के अध्यक्ष सुदेश देशमुख के नेतृत्व में राष्ट्रीय गौरव यात्रा का शिवाजी पार्क में राष्ट्रीय गौरव यात्रा का स्वागत कार्यक्रम किया गया। उन्होंने बताया स्वागत करने कुर्मी समाज, महाराष्ट्रीय कुनबी समाज, पवार समाज, देवांगन समाज एवं सर्व समाज के पदाधिकारी और सदस्यों ने यात्रा का स्वागत किया। छत्रपति शिवाजी महाराज के देश और स्वराज के लिए संघर्ष को भूलाया नहीं जा सकता। राष्ट्रीय गौरव यात्रा महाराष्ट्र के नासिक से 14 फरवरी को निकली जो पाटेकोहरा, राजनांदगांव से दुर्ग भिलाई, रायपुर होकर 19 फरवरी को जगन्नाथपुरी पहुंच कर विश्राम लेगी। यात्रा का स्वागत करने के लिए सर्व समाज के लोग जुटे छत्रपति शिवाजी महाराज के सम्मान में निकली राष्ट्रीय गौरव यात्रा का स्वागत करने सर्व समाज से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। स्वागत कार्यक्रम में पूर्व महापौर हेमा सुदेश देशमुख, महाराष्ट्रीय कुनबी समाज के जिला अध्यक्ष अजय कड़व, देवांगन समाज के संरक्षक दयावान देवांगन, मराठा मलई समाज अध्यक्ष गणेश पवार, महाराष्ट्रीय स्वर्णकार समाज के अध्यक्ष रूपेश फोये, मानव देशमुख, मंगला पाथोड़े, मंदा हुकरे, छाया शिवनकर, सहित सर्व समाज के पदाधिकारी और सदस्य शाम तक बड़ी संख्या में मौजूद रहे। बड़ी संख्या में बच्चों और बुजुर्गों की उपस्थिति रही।


