शिव विधायक ने रविंद्र सिंह भाटी मीडिया बातचीत में सरकार और कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा- एक गौभक्त बने है और एक गोभक्त बनना चाह रहे है। दोनों की राजनीतिक लड़ाईयों के कारण और इश्यू को बनाए। अगले दिन अखबारों में छपे इसलिए पक्ष और विपक्ष की छोटी-छोटी हरकतों के कारण प्रदेश की 8 करोड़ जनता को निराशा हाथ लगी है। आज जो चर्चा होती और जनहित के मुद्दे आगे आते कई लोगों की बात सरकार तक पहुंचती। भाटी ने कहा जो लोग गोभक्त बने बैठे थे। आज उनकी बात आगे आई। इश्यू बड़ा हो गया। वर्तमान सरकार और पूववर्ती सरकार दोनों प्रदेश की जनता ने जीताया। पूववर्ती सरकार ने लाखों बीघा ओरण गोचर जमीन, गोवंश का चारागाह पूरे तरीके से मल्टीनेशनल कंपनी के हाथ में दे दिया। अगर आप इतने बड़े गोभक्त थे पूववर्ती सरकार में लाखों बीघा के जमीन का अलांटमेट क्यूं किए। आज के समय जो वर्तमान सरकार खुद सनातनी सरकार कहती है। जयश्रीराम का नारा लेकर सियासत की दहलीज तक आए हो। भाटी ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा बेजुबान जानवर भी हम पूछने लगे है इसानों से हक तो हमारा भी था फिर क्यूं बेदखल किया मैदानों से..। गाय के नाम पर राजनीति हो रही है भाटी ने कहा जिस गाय की बात हम कर रहे हो, उस गाय की जमीन को आप लोग ही अलांट कर रहे हो। कौनसी ऐसी ताकतें जो आपको दबा रही है। यह प्रदेश की जनता जानना चाहती है। सरकार सनातन, प्रकृति की बात करते है। आपकी कथनी और करनी में फर्क है। आज के समय में धरा और धेनू का सौंदा कौन कर रहा है। इसके नाम पर राजनीति कौन कर रहा है। यह बहुत बड़ा विषय है। दोनों पॉलिटिकल पार्टी गाय के नाम पर पाखंड कर रही है भाटी ने कहा- संतों ने कहा था कि जिस धरती पर गाय के पैर रखने की जगह नहीं बचे है उस धरती पर धर्म की दुआई देना केवल पांखड है। आज के समय में दोनों पॉलिटिकल पार्टी सिर्फ पाखंड कर रही है। पश्चिमी राजस्थान में तमाम ग्रामीण अर्थव्यवस्था है पूरी तरीके से गोवंश, पशुधन पर टिकी है। वहां पर जमीन अलांट हो रही है। पक्ष तो जमीन आवंटन कर रहा है लेकिन विपक्ष भी सो रहा है। करीबन 30 लाख गोवंश वहां पर है। आज मुद्दा गाय का उठा रहा है। वह ठीक है ऐसा नहीं होना चाहिए। लेकिन विपक्ष उन 30 लाख गोवंश की तो बात करें। क्योंकि उसमें पॉलिटिकल माइलेज नहीं है। तमाम इश्यू पर बात नहीं करनी है। इनको केवल राजनीति करनी है। सनातनी सरकार साधुं संतों के साथ कर रही है दुराचार भाटी ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि जिस ऋषि और कृषि की बात वर्तमान में सनातन की सरकार कर रही है। इनके ही राज में सियाणी गांव मठाधीश है। दूदाबेरी सोखरू गांव में 14 हजार बीघा गोचर जमीन को बचाने के लिए धरने पर बैठे है। क्यों कि वह बिना किसी एनओसी ( संबंधित ग्राम पंचायत) के कंपनियों की दी जा रही है। कोई एनओसी नहीं ली गई गोचर को खत्म कर दिया गया। वहां पर संत 12 जनवरी 2026 को धरने पर बैठे है। आज दिन तक उस गोचर पर आज दिन तक निर्णय नहीं लिया गया है। वहां पर बैठे संतों के साथ दुराचार किया गया। एक तरफ बोलते हो कि सनातन की सरकार है हम गाय को बचाने वाली सरकार है। गाय मर रही है। गोमाता, विश्वमाता जिसकी बात थोड़ी देर पहले मंत्रीजी कर रहे थे। ऑपरेशन सिंदूर समेत विकट परिस्थिति में पहली पंक्ति खड़े लोग पलायन करने को मजबूर भाटी ने बाड़मेर-जैसलमेर के इंटरनेशनल बॉर्डर से सटे गांव के ग्रामीण पलायन होने के लिए मजबूर हो रहे है। इंटरनेशनल बॉर्डर पर बैठे मजबूत लोग जो ऑपरेशन सिंदूर से लेकर हर जगह पहली पंक्ति में आपके लिए लड़ाई लड़ रहे थे। आज जबरदस्ती उनकी जमीन को अलांट करके पलायन करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। एक उदाहरण देते हुए कहा कि डालमिया सीमेंट को एक जमीन अलांट हुई। 80 पक्के मकान अलांट कर दिया। आपका कोई भी व्यक्ति नीचे जाकर भौतिक सत्यापन करता है क्या? वहां पर कौन है। आप गरीब लोगों के घर उजाड़ने में लगे हुए हो। 100 से ज्यादा गांव के लोगों को पलायन के लिए किया जा रहा है मजबूर बाड़मेर-जैसलमेर के 100 से ज्यादा गांव पलायन करने के लिए मजबूर कर रहे है। यह कहते है कि भारत गांवों में बसता है। आज इन गांवों को कौन जमीन अलांट कर रहा है। किसानों की बात करते है। उनकी छाती पर हाईटेशन लाइन टावर के नाम पर उनको कौन जलील और परेशान कर रहा है। सरकार मल्टीनेशनल कंपनी के आगे घुटनें नहीं टेकें भाटी ने कहा- सरकार को कहना चाहता हूं कि मल्टीनेशनल कंपनी के आगे घुटने नहीं टेके। प्रदेश की जनता को वोट देकर यहां तक पहुंचाया है। आप विश्वास पर खरे उतरे। आखिर में दो साल तो निकल चुके है। तीन साल बाद काम यह जनता आनी है। मल्टीनेशनल कंपनी आपको यहां पर नहीं पहुंचाएगी। विपक्ष ने यह काम किया तभी वो ना पक्ष में बैठे है।


