राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने गुरुवार को अलवर के राजा भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय के दूसरे चरण के शिलान्यास समारोह में कहा कि मैं बालिकाओं से विनती करता हूं कि आप ताकवार बने शक्तिवान बनो। कुछ बच्चे तकलीफ देते हैं। हम पढ़ते हैं पेपर में। हिम्मत रखो। हमारे यहां तो बहुत हिम्मतवान छात्राएं हैं। उनको आदर्श रखकर मजबूती से काम करना चाहिए। मजबूती से रहना चाहिए। कोई गलत व्यवहार करते तो थप्पड़ मारो चप्पल मारो। कुछ होगा नहीं जरूर पीटो। मैं बहुत से वीडियो देखता हूं। मुझे शर्म आती है कि लोग किसी लड़के पीछे उसकी इज्जत लेने का तैयार होते हैं और हम वीडियो निकालते हैं। ये मानसिकता है तुम्हारी। ये मोबाइल छोड़ा। दौड़ो और पकड़ो उनकी गच्छी। पुलिस की राह देख रहे हो। अरे जब तक किसी औरत का खून भी हो जाए। ये मानसिकता क्यों आ गई। ये मानसिकता हो कि कोई औरत को परेशान कर तो हम पहले दौड़कर जाएंगे। ये मानसिकता बनाएं। ये भारत का संकल्प होगा। ये भारत आगे जाएगा। मानसिकता के ऊपर बहुत कुछ निर्भर करता है। राज्यपाल ने भारत की शिक्षा पद्वति को लेकर कहा कि देश में तिरंगा झंडा फहराया उसी समय हमारी शिक्षा पद्वति बदलने की जरूरत थी। लेकिन उसे 75 साल से भी ऊपर हो गया। उसके बाद अब बदल गई। इसलिए हमारा बहुत सा समय गया। ये उनका भी ध्यान था। केवल डिग्री हासिल करने की मत सोचो राज्यपाल ने कहा कि नौकरी पर जाने के लिए योग्य बनें। इसका मतलब केवल डिग्री हासिल करना नहीं है। हमारे बौद्धिक क्षमता दिखानी होगी। नौकरी पर जाने के बाद स्पर्द्धा बहुत है। चाहे आरक्षण वाले व गैर आरक्षण वाले। सबके लिए स्पद्धार् है। केवल टेक्स्ट बुक पढ़ने से पास हो सकते हैं। टेक्स्ट बुक के अलावा पढ़ना होगा। जो अलग से पढ़ाई करेंगे। वो आगे निकलेंगे। हमारे प्राध्यापकों से पढ़ना चाहिए। शिक्षा पद्वति में थोड़ा बहुत बदलाव हुआ है। लेकिन मुख्य स्वरूप में अधिक बदला नहीं हुआ है। विश्वविद्यालय टैलेंट बनाए इसलिए विश्वविद्यालय है। डिग्री का उपयोग पहले होता था, अब टैलेंट चाहिए राजयपाल ने कहा कि अब केवल डिग्री लेना शिक्षा नहीं है। डिग्री का उपयोग बहुत पहले होता था। जब नौकरियां अधिक थी और डिग्री कम थी। लेकिन अब नहीं है। अब भारत में नालंदा विश्वविद्यालय की पहचान आगे बढ़ाने का काम शुरू हो चुका है। पहले हमारी संस्कृति नष्ट करने की कोशिश की गई। लेकिन हमारे लोगों ने जीवित रहकर सबको सुरक्षित रखने का प्रयास किया। अब हम हमारे देश का विकास कर सकते हैं। नई शिक्षा पद्वति 2020 में बनी है। हमारे देश के 400 कुलपति और 1शिक्षा क्षेत्र के जाने माने 1400 लोगों ने दो साल में शिक्षा नीति बनाई है। ये शिक्षा नीति देश के लिए अच्छी रहेगी। हमारे यहां का विद्यार्थी अच्छा शिक्षित हो। ऐसी शिक्षा पद्वति बढ़ाएंगे। छह साल में पहली कक्षा में डालते हैं। लेकिन अब तीन साल का बालक भी स्कूल जाने का प्रावधान है। 2012 का विश्वविद्यालय स्थापित हुआ। उसके बाद शिक्षा प्रसार के महती कार्य किए हैं। हमारे देश की महान विभूती के नाम से अलवर का विश्वविद्यालय है। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव बोले – बालिका सैनिक स्कूल बनेगा यहां इस समारोह में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि हमारे विश्वविद्यालय का सौभागय है कि आप कुलाधिपति हैं। आपने सब कुलपतियों को लिखा कि उनके स्वागत में आए तो फूल माला लेकर मत आना आपके विश्वविद्यालय की शोध की पुस्तक लेकर आना। जिससे साफ मतलब है कि विश्वविद्यालय में एकेडमिक स्टैंडर्ड को खड़ा करना है। यह राजा भर्तृहरि की तपो भूमि रही है। वे राजा तो उज्जैन के थे। लेकिन व्यक्ति जीवन में सत्य का साक्षात्कार करते देखता है तो बाकी सांसारिक जीवन को देखना छाेड़कर अंदर देखना प्रारंभ करता है। ऐसा ही महाराज भर्तृहरि की जीवन है। उन्होंने अलवर में नीति शतक, शृंगार व वैराग्य शतक पुस्तकाें की रचना की थी। इन तीन पुस्तकों ने पूरे भारत के सांस्कृतिक मूल्यों को आगे बढ़ाने का काम किया है। इसके बाद केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हल्दीना में सैनिक स्कूल की जमीन पहले से चिह्नित थी। इसलिए राज्य सरकार ने हल्दीना में बालिका सैनिक स्कूल की स्थापना करने की घोषणा की है। जिसके लिए हमने सरकार से पहले बात भी की थी।


