गुमला जिले को दहला देने वाले 25 सितंबर 2021 के ट्रिपल मर्डर कांड में आखिरकार न्याय की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। एडीजे-वन की अदालत ने आरोपी विपता उरांव को तीन लोगों की निर्मम हत्या का दोषी करार दिया है। यह फैसला प्रेम शंकर की अदालत ने सुनाया। अब सजा के बिंदु पर 18 फरवरी को सुनवाई होगी। पांच साल पहले की वह खौफनाक रात आज भी ग्रामीणों के जेहन में ताजा है। 25 सितंबर 2021 की रात लगभग आठ बजे सिकंदर कुंजूर को फोन पर सूचना मिली कि उसकी मौसी बसमनी देवी के घर में भीषण मारपीट हो रही है। सूचना मिलते ही वह दौड़ता हुआ गांव पहुंचा, लेकिन वहां जो उसने मंजर देखा, उसकी रूह कंपा दी। आरोपी विपता उरांव ने लोहे की रॉड से ताबड़तोड़ हमला कर बसमनी देवी, सोमारी देवी (55 वर्ष) और बंधन उरांव (60 वर्ष) को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया था। घर के आंगन में खून से सना दृश्य देख ग्रामीण सन्न रह गए। आसपास के लोगों के मुताबिक, वारदात के दौरान आरोपी चिल्ला रहा था कि जब वह बाहर कमाने गया था। तब उसकी तबीयत खराब करने के लिए यही लोग जिम्मेदार थे। इसी कथित रंजिश में उसने खून की होली खेल दी थी। घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शवों को कब्जे में लिया और मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान कई अहम साक्ष्य जुटाए गए। अदालत में चली लंबी सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मजबूत पैरवी की।
सरकार की ओर से लोक अभियोजक अजय कुमार रजक ने गवाहों और सबूतों के आधार पर आरोपी के खिलाफ ठोस दलीलें पेश कीं। अदालत ने प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, चिकित्सीय रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों को मद्देनजर रखते हुए विपता उरांव को दोषी ठहराया। इस फैसले के बाद मृतकों के परिजनों ने राहत की सांस ली है। हालांकि, गांव में आज भी उस काली रात की चर्चा होते ही लोग सिहर उठते हैं। अब 18 फरवरी को अदालत दोषी को सजा सुनाएगी। माना जा रहा है कि यह फैसला गुमला के आपराधिक इतिहास में एक मिसाल बनेगा और समाज में यह संदेश देगा कि कानून के हाथ लंबे होते हैं और अपराधी कितना भी शातिर क्यों न हो, अंततः न्याय के कटघरे में पहुंचता ही है।


