भास्कर न्यूज | बेमेतरा जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) में डीएलएड प्रथम एवं द्वितीय वर्ष के छात्राध्यापकों के लिए चेतना विकास एवं मूल्य शिक्षा विषय पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। प्रशिक्षण का उद्देश्य भावी शिक्षकों में मानवीय मूल्यों, नैतिक दृष्टिकोण और सकारात्मक मानसिकता का विकास करना है, ताकि वे भविष्य में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में प्रभावी भूमिका निभा सकें। प्रशिक्षण के दूसरे दिन प्राचार्य जेके घृतलहरे ने कहा कि जीवन विद्या एक ऐसा दार्शनिक एवं व्यावहारिक ज्ञान है, जो व्यक्ति को स्वयं की चेतना को समझने, मानवीय संबंधों को सुदृढ़ बनाने और प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित कर संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि सुख, शांति, समृद्धि और संतोष के साथ जीवन जीने की कला सिखाना भी है। शरीर और चेतना के संतुलन से ही परिवार एवं समाज में विश्वास, सम्मान और न्याय जैसे मूल्यों की स्थापना संभव है। अस्तित्व स्थिर है और जागरूकता निश्चित: मानव तीर्थ किरीतपुर से आए प्रबोधक राम मिलन यादव ने मानव केंद्रित चिंतन पर बातें कही। बताया कि मनुष्य में तीन प्रकार की विचारधाराएं देखने को मिलती हैं, ईश्वर केंद्रित, वस्तु केंद्रित और अस्तित्व मूलक मानव केंद्रित विचारधारा। उन्होंने कहा कि अस्तित्व स्थिर है और जागरूकता निश्चित है। मनुष्य जीवन और शरीर का संयुक्त रूप है, जिसमें चेतना संचालक की भूमिका निभाती है। व्यक्ति जितनी पात्रता विकसित करता है, उतनी ही गहराई से वह जीवन को समझ पाता है। प्रबोधक अंकित पोगुला ने कहा कि शिक्षा का सबसे बड़ा प्रभाव मानसिकता में परिवर्तन से आता है। यदि मानसिकता बदल जाए तो व्यवहार अपने आप बदल जाता है। सिग्नल पर पुलिस न हो, फिर भी यदि हमारी सोच सही है तो हम लाल बत्ती पर रुकेंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षक का कार्य केवल विषय पढ़ाना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में समझ, संवेदनशीलता और चरित्र का निर्माण करना है। यदि शिक्षा मूल्य आधारित नहीं होगी तो उसका दुरुपयोग होने की आशंका रहती है।


