खस्ताहाल सड़क-स्कूल में कब्जे के विरोध में 9 गांव के ग्रामीणों ने चक्काजाम किया

भास्कर न्यूज | सीपत खम्हरिया-सोंठी-नवापा रा मार्ग की बदहाली और स्कूल परिसर में अवैध कब्जे के मुद्दे को लेकर मंगलवार को मस्तूरी क्षेत्र के ग्रामीणों ने विरोध-प्रदर्शन किया। करीब 9 ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों ने लामबंद होकर खम्हरिया बस स्टैंड मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। करीब डेढ़ घंटे तक चले इस विरोध प्रदर्शन के कारण बलौदा-सीपत मार्ग पूरी तरह ठप रहा, जिससे सड़क के दोनों ओर वाहनों की कतारें लग गईं। चक्काजाम दोपहर 12:30 बजे शुरू हुआ और 2:00 बजे तक चला। प्रदर्शन में सोंठी, पिपरानार, जुहली, कारिछाप, जेवरा, नवापारा, खोंधरा, कनई और निरतु सहित आसपास के गांवों के ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल हुए। आंदोलनकारियों ने प्रशासन और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। हालांकि, इस दौरान ग्रामीणों ने संवेदनशीलता का परिचय देते हुए एम्बुलेंस और महतारी एक्सप्रेस जैसे आपातकालीन वाहनों को रास्ता दिया, ताकि मरीजों को परेशानी न हो। कांग्रेस नेता एवं जनपद सदस्य प्रतिनिधि देव सिंह पोर्ते के नेतृत्व में ग्रामीण सड़क निर्माण शुरू करने की निश्चित तिथि की मांग पर अड़े रहे। ग्रामीणों का कहना था कि 12 किलोमीटर लंबी यह जर्जर सड़क उनके लिए जी का जंजाल बन चुकी है। साथ ही जेवरा के शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल परिसर में हुए कथित अवैध कब्जे को तत्काल हटाने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने खोला चक्काजाम: तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए सीपत तहसीलदार सोनू अग्रवाल और लोक निर्माण विभाग के सब इंजीनियर मौके पर पहुंचे। तहसीलदार ने ग्रामीणों को बताया कि जेवरा स्कूल के पास हुए कब्जे का मामला फिलहाल न्यायालय में है। उन्होंने आश्वासन दिया कि दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जाएगी और विधिक प्रक्रिया के तहत उचित कार्रवाई होगी। सड़क निर्माण के संबंध में तहसीलदार ने भरोसा दिलाया कि प्रक्रिया अंतिम चरण में है और एक माह के भीतर प्रशासकीय स्वीकृति मिल जाएगी। अधिकारियों के लिखित और मौखिक आश्वासन के बाद दोपहर 2 बजे जाम समाप्त किया गया। इस दौरान सीपत थाना प्रभारी राजेश मिश्रा पुलिस बल के साथ सुरक्षा व्यवस्था संभालते रहे। चक्काजाम से ठीक एक दिन पहले लोक निर्माण विभाग के ईई सीएस विंध्यराज ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट में इस मार्ग के लिए 25.37 करोड़ रुपए का प्रावधान किया जा चुका है। विस्तृत प्राक्कलन (एस्टीमेट) तैयार कर मंत्रालय भेज दिया गया है। तकनीकी संशोधन पूरे हो चुके हैं और मामला अब केवल अंतिम प्रशासकीय स्वीकृति के लिए लंबित है। 12 किलोमीटर लंबी इस सड़क के बनने से क्षेत्र के हजारों किसानों और नागरिकों का आवागमन सुगम हो जाएगा। प्रशासन को दिया 15 तक का अल्टीमेटम भले ही आश्वासन के बाद जाम खुल गया हो, लेकिन ग्रामीणों का गुस्सा शांत नहीं हुआ है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 15 मार्च 2026 तक धरातल पर निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं हुआ, तो वे बिना किसी पूर्व सूचना के जिला मुख्यालय स्तर पर उग्र आंदोलन करेंगे।

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