अजय देवांगन | धमतरी
धमतरी में पुराने और जर्जर आंगनबाड़ी भवनों को तोड़कर एक नई सोच के तहत “बाला’ यानी बिल्डिंग एस लर्निंग एड मॉडल के रूप में उसे पुनर्निर्मित किया है। यह पहल बच्चों को खेल-खेल में पढ़ने और विकसित होने का अवसर देती है, जिससे उनके मानसिक विकास में तेजी आए। इससे यह लाभ हुआ कि जितने भी आंगनबाड़ी भवन निर्माण के बाद संचालित हो रहे हैं, वहां बच्चों की उपस्थिति 100 प्रतिशत हो गई है। इस इनोवेटिव सोच को जिला प्रशासन ने पेश किया। अब पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की प्रमुख सचिव निहारिका बारिक सिंह ने प्रदेश के सभी कलेक्टर्स को निर्देश दिए हैं कि धमतरी के बाला कॉन्सेप्ट का उपयोग करते हुए इसे अपने जिलों में लागू करें। धमतरी के कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के इस नवाचार ने जिले को एक अलग पहचान दिलाई है, क्योंकि यह पहल अब पूरे प्रदेश में लागू होने जा रही है। {11.69 लाख है लागत {8 लाख- मनरेगा से {2 लाख- महिला व बाल विकास विभाग {1.69 लाख- 15वां वित्त आयोग से बच्चों को आकर्षित करने दीवारों पर सुंदर चित्रकारी की गई । ब्लाक स्वीकृत पूर्ण निर्माणाधीन धमतरी 17 11 06 कुरूद 20 20 00 मगरलोड 19 14 05 नगरी 25 06 19 कुल 81 51 30 बाला मॉडल ऐसे समझें : भवन के दीवारों, फर्श, सीढ़ियों, दरवाजों और खुले स्थानों को शिक्षण माध्यम के रूप में विकसित किया है। दीवारों पर स्थानीय संस्कृति, गणितीय अवधारणाएं, भाषा चार्ट, फर्श पर रंग-आकार और सीढ़ियों पर गिनती संरचना बच्चों में जिज्ञासा, स्मरण शक्ति और सीखने की रुचि बढ़ा रही है। हिंदी-अंग्रेजी वर्णमाला, अंक, आकृतियां, दिशाएं, जीव-जंतु और सामान्य ज्ञान संबंधित चित्रकारी की गई है।


