व्यक्तित्व विकास और सामुदायिक सेवा की भावना जगाना है रासेयो का मुख्य उद्देश्य

भास्कर न्यूज | दशरंगपुर शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल ग्राम दशरंगपुर के रासेयो के 100 स्वयंसेवक ने ग्राम ज्ञानपुर में सात दिवसीय शिविर का आयोजन किया। इस शिविर के समापन पर जपं कवर्धा उपाध्यक्ष व शिक्षा समिति के सभापति गणेश तिवारी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस मौके पर उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि सेवा कार्य व्यर्थ नहीं जाता, निस्वार्थ भाव से किए गए सेवा का फल मिलकर ही रहता है। प्रकृति-जीव-जन्तु व मानव की सेवा कर हम ईश्वर को पा सकते है। उन्होंने ज्ञानपुर में उत्कृष्ट कार्य व सेवा कार्य करने वाले स्वयंसेवकों व ग्रामीणों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया। गांव में स्वयंसेवकों द्वारा ग्रामीणों को स्वास्थ्य, बाल विवाह, कृषि-उद्यानिकी, पशु समेत अन्य प्रकार की जानकारी दी गई। साथ कई कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को जागरूक किया। इस अवसर पर समाजसेवी छन्नूलाल साहू, कार्यक्रम अधिकारी रवेन्द्र सिंह चंद्रवंशी, संदीप साहू, गीतेश्वर चंद्राकर, चित्रेण साहू, नीलम साहू, खुशी साहू, मुस्कान धुर्वे, खुशबू साहू, भारती साहू, दिलेश्वरी निर्मलकर, रिंकी यादव, किरण साहू समेत अन्य लोग मौजूद थे। इस कार्यक्रम में गणेश तिवारी द्वारा स्वयं सेवकों व ग्रामीणों का सम्मान किया। इसमें अर्जुन राजपूत, डलेश्वर चंद्राकर, खुलेश्वर साहू, थानेश्वर चंद्राकर, गोपाल चंद्राकर, पोखराज साहू, धनराज साहू, सुमित चंदाकर, प्रकाश साहू, सागर चंद्राकर, कुलेश्वर सिन्हा, लक्ष्मण सिन्हा, अजय धुर्वे, जयंती बारले, राजेश निषाद, ऋतु निषाद, गणेश धुर्वे, लवकुश चंद्राकर, गोमती चंद्राकर, पुष्पांजली यादव, शारदा साहू, मंजू साहू समेत अन्य लोग शामिल है। इन सभी ने शिविर के दौरान ग्रामीणों को जागरूक किया है। इन लोगों ने कहा कि आगे भी शिविर के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जाएगा। समापन के मौके पर एएलटी स्काउट मास्टर हेमधर साहू ने रासेयो के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना युवाओं को समाज से जोड़कर, उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में विकसित होने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का अवसर प्रदान करती है। राष्ट्रीय सेवा योजना भारत सरकार के युवा मामले और खेल मंत्रालय की एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसकी शुरुआत 24 सितंबर 1969 को हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों में सेवा के माध्यम से शिक्षा के द्वारा व्यक्तित्व विकास और सामुदायिक सेवा की भावना जगाना है। इसका आदर्श वाक्य “मैं नहीं, बल्कि आप” है। युवाओं को सांस्कृतिक विरासत से जोड़ते हुए उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया गया।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *