भास्कर न्यूज | अंबिकापुर मैनपाट महोत्सव के अंतिम दिन आयोजित कवि-सम्मेलन ने महोत्सव की गरिमा में चार चांद लगा दिए। प्रकृति की गोद और काव्यमय वातावरण के बीच संपन्न इस आयोजन ने देर रात तक श्रोताओं को बांधे रखा। वरिष्ठ गीतकार संतोष सरल के प्रभावशाली संचालन में स्थानीय व क्षेत्रीय कवियों ने प्रकृति, भक्ति और सामाजिक सरोकारों पर आधारित अपनी कालजयी रचनाओं से समां बांध दिया। कार्यक्रम का आगाज पुनम दुबे ‘वीणा’ के मधुर सरगुजिहा गीत चला संगी रे घूमे जाबो ना, सुग्घर-सुग्घर मैनपाट के देखे जाबो ना से हुआ, जिसने मैनपाट की खूबसूरती को सुरों में पिरोया। इसके बाद आशुकवि विनोद हर्ष ने मैनपाट को ईश्वर की अनुपम कृति बताते हुए काव्य पाठ किया। वहीं, डॉ. अंचल सिंहा की पंक्तियां सुबह-सबेरे हल्दी बिखरे जैसे मेरी छाती में, सूरज कुछ ऐसे आता है मेरी प्यारी घाटी में ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। महाशिवरात्रि के अवसर पर कवियों ने भगवान शिव को भी अपनी रचनाएं समर्पित कीं। वरिष्ठ गीतकार रंजीत सारथी ने शिव तुम्हीं दया करो, तुम बिन हमारा कौन है सुनाकर पंडाल को भक्तिमय कर दिया। शायर मुकुन्दलाल साहू ने जनसेवा की कामना करते हुए शिव भक्ति उकेरी, तो कवयित्री आशा पांडेय और डॉ. सपन सिन्हा ने भी भोलेनाथ के स्वरूप पर सुंदर काव्य पाठ किया। कवि राजेश पांडेय ने विरह गीत और डॉ. योगेन्द्र सिंह गहरवार ने जीवन दर्शन पर रचनाएं पढ़ीं। राजेंद्र राज ने दहेज प्रथा के खिलाफ अलख जगाई, वहीं अनिता मंदिलवार और माधुरी जायसवाल ने संघर्ष और सकारात्मकता पर अपनी बात रखी। कृष्णकांत पाठक के प्रेमगीतों और देवेन्द्रनाथ दुबे की हास्य कविताओं ने दर्शकों को खूब गुदगुदाया। कार्यक्रम के अंत में जिला प्रशासन की ओर से सभी कवियों को प्रमाण-पत्र और स्मृति-चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर एसडीएम सीतापुर रामराज सिंह, उपायुक्त शारदा अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में प्रशासनिक अधिकारी और काव्यप्रेमी उपस्थित रहे।


