भास्कर न्यूज| महासमुंद जीवन में सकारात्मकता और समस्या समाधान की आदत ही वास्तविक सफलता की कुंजी है। यदि नशा करना ही है, तो अपनी प्रगति और लक्ष्यों को पाने का नशा करें। उक्त बातें मुख्य अतिथि डॉ. एकता लंगेह ने वल्लभाचार्य महाविद्यालय महासमुंद में आयोजित नशा मुक्त भारत अभियान के दौरान व्यक्त किया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के लगभग 125 छात्र-छात्राएं और सभी स्टाफ मौजूद रहे। इस एक दिवसीय व्याख्यान का उद्देश्य युवाओं को नशे के जाल से बचाकर एक स्वस्थ समाज का निर्माण करना था। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के स्वागत और प्राचार्य के उद्बोधन से हुई। प्राचार्य करुणा दुबे ने नशे के विभिन्न प्रकारों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शारीरिक, मानसिक और नैतिक शिक्षा ही वह ढाल है, जो विद्यार्थियों को भटकने से बचा सकती है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने परिवार और समाज को नशा मुक्त करने के लिए प्रेरित किया। डॉ. एकता लंगेह ने अपने संबोधन में विस्तार से बताया कि नशे की लत व्यक्ति का सामाजिक सम्मान छीन लेती है। उन्होंने विशेष रूप से डिजिटल नशे (मोबाइल फोन) पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा समय की कीमत बताया। कहा कि यह उम्र विद्या अर्जित करने की है, जो बीत जाने पर वापस नहीं आएगी। इसलिए नशे के बजाय खेल-कूद, योग और करियर निर्माण पर ध्यान केंद्रित करें। तनाव से बचने के लिए परिवार के साथ अधिक समय बिताएं और आसपास सकारात्मक वातावरण निर्मित करें। कार्यक्रम का संचालन राजेश्वरी सोनी ने किया। प्रमुख सहभागिता: डॉ. रीता पांडे, डॉ. मालती तिवारी, आशुतोष पुरी गोस्वामी, डॉ. जगदीश सत्यम रेड क्रॉस प्रभारी अजय कुमार राजा सहित अन्य प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। विशिष्ट अतिथि डॉ. युगल चंद्राकर ने वैज्ञानिक तथ्यों के साथ नशे के दुष्प्रभावों को समझाया। उन्होंने बताया डोपामीन का प्रभाव बताया। कहा कि नशा शरीर में डोपामीन का स्तर बढ़ाकर क्षणिक उत्तेजना देता है, जो अंततः विनाशकारी है। 4 घंटे से अधिक मोबाइल का उपयोग नशे की श्रेणी में आता है। यह रोशनी ग्रोथ हार्मोन्स को प्रभावित कर रही है, जिससे युवाओं में समय से पहले बुढ़ापा और बीमारियां (बौनापन, रक्त की कमी, मानसिक तनाव) बढ़ रही हैं।


