झारखंड के उच्च शिक्षण संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था को सख्त और जवाबदेह बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने अहम पहल की है। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने सभी विश्वविद्यालयों, अंगीभूत और संबद्ध कॉलेजों के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) का ड्राफ्ट तैयार किया है, जिसे अनिवार्य रूप से लागू करने की तैयारी है। ड्राफ्ट में स्पष्ट किया गया है कि विश्वविद्यालय और कॉलेजों में सुरक्षित, लैंगिक-संवेदनशील और भयमुक्त माहौल सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी होगी, यह विकल्प नहीं रहेगा। कैंपस में बढ़ती असुरक्षा और उत्पीड़न की घटनाओं को देखते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को बाध्यकारी व्यवस्था बनाने का निर्देश दिया था। उसी के आधार पर यह एसओपी तैयार की गई है। विभाग ने सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों से ड्राफ्ट पर शीघ्र मंतव्य देने को कहा है। अंतिम मंजूरी के बाद इसे पूरे राज्य में लागू किया जाएगा और पालन अनिवार्य होगा। किसी भी सुरक्षा चूक, उत्पीड़न या लापरवाही की स्थिति में संस्थान प्रमुख की जवाबदेही तय की जाएगी। बता दें कि राज्य में 2017-18 में 18 विश्वविद्यालय थे, जो अब बढ़कर 32 हो गए हैं। कॉलेजों की संख्या 307 से बढ़कर 344 पहुंच गई है। नामांकन में वृद्धि और छात्राओं की 50% से अधिक भागीदारी को देखते हुए सुरक्षित और जेंडर-संवेदनशील कैंपस अब प्रशासन की प्राथमिकता है। वह सब कुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है कैंपस में 24×7 सुरक्षा व्यवस्था
ड्राफ्ट के अनुसार सभी संस्थानों में प्रशिक्षित सुरक्षा गार्डों की 24 घंटे तैनाती होगी। कैंपस में प्रवेश के लिए सीमित गेट और विजिटर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य रहेगा। सभी छात्रों और कर्मियों के लिए फोटो पहचान पत्र जरूरी होगा। बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू करनी होगी। कैंपस-छात्रावास के एंट्री-एग्जिट प्वाइंट, कॉरिडोर और पार्किंग में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। रिकॉर्डिंग 30 दिनों तक सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा। पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था और पावर बैकअप की व्यवस्था करनी होगी। उत्पीड़न पर संस्थान प्रमुख जिम्मेवार
विवि और कॉलेजों में आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) का गठन अनिवार्य होगा। शिकायतों की सुनवाई तय समय सीमा में करनी होगी। जरूरत पड़ने पर प्राथमिकी दर्ज कराने में समिति सहयोग करेगी। आईसीसी की सिफारिशों को लागू करना संस्थान प्रमुख की जिम्मेदारी होगी। हेल्पलाइन नंबर वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर जारी करना होगा। ड्राफ्ट में स्पष्ट है कि किसी भी प्रकार की सुरक्षा चूक, उत्पीड़न या लापरवाही पर संस्थान प्रमुख की जवाबदेही तय होगी। महिला सुरक्षा पर विशेष प्रावधान
महिला सुरक्षा को विशेष प्राथमिकता दी गई है। महिला छात्रावासों में अलग प्रवेश द्वार और महिला सुरक्षा गार्ड की तैनाती अनिवार्य होगी। स्वच्छ और पृथक शौचालय, सेनेटरी वेंडिंग मशीन और सुरक्षित डिस्पोजल की व्यवस्था करनी होगी। महिला विश्राम कक्ष की अनिवार्यता भी तय की गई है। विभाग का मानना है कि छात्राओं की बढ़ती संख्या देखते हुए सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण जरूरी है। कैंपस में अनिवार्य सुविधाएं
सभी संस्थानों में आधुनिक फायर सेफ्टी सिस्टम और नियमित फायर ड्रिल जरूरी होगी। स्वच्छ पेयजल और साफ शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। कैंटीन और मेस में गुणवत्ता और स्वच्छता की निगरानी अनिवार्य होगी। बड़े कैंपस में ई-रिक्शा या फीडर बस की व्यवस्था करनी होगी, ताकि छात्र-छात्राओं को सुरक्षित आवागमन मिल सके। हेल्थ केयर यूनिट बनानी होगी, 24 घंटे एंबुलेंस सुविधा
विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में हेल्थ केयर यूनिट (एचसीयू) स्थापित करनी होगी। पूर्णकालिक डॉक्टर, नर्स, फार्मासिस्ट और काउंसलर की नियुक्ति करनी होगी। 24×7 एंबुलेंस सुविधा मिलेगी और नजदीकी अस्पताल से एमओयू करना अनिवार्य होगा। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों से सहयोग, योग और ध्यान कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे। जेंडर ऑडिट कर रिपोर्ट वेबसाइट पर अपलोड करनी होगी। सुरक्षा और महिला संरक्षण पर वार्षिक स्टेटस रिपोर्ट जारी करना अनिवार्य होगा। वूमन स्टडी सेंटर की स्थापना होगी।


