इस बार समय से पहले रांची के बाजार में पहुंचे दक्षिण भारत के आम, बेंगलुरु का ‘ललमुनिया’ 350 रुपए किलो

रांची में होली से पहले ही बाजारों में आम की मिठास घुलने लगी है। दक्षिण भारत से आम की खेप पहुंचने के साथ फलों की दुकानों पर रौनक बढ़ गई है। डेली मार्केट में बेंगलुरु से आया ललमुनिया और केरल से पहुंचा केरी आम खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इन किस्मों की अच्छी मांग देखी जा रही है। रमजान से पहले आम की आवक ने बाजार की चहल-पहल और बढ़ा दी है। दुकानदारों ने कहा कि ललमुनिया आम गुलाब खस आम की वेराइटी है। यह डेली मार्केट में 350 रुपए किलो बिक रहा है। वहीं, केरल का कच्चा आम केरी 100 रुपए किलो बिक रहा है। फल विक्रेता मो. शौकत के अनुसार, इस वर्ष मार्च से पहले ही आम बाजार में पहुंच गए हैं, जो सामान्य से थोड़ा पहले है। दक्षिण भारत में इस बार फसल अच्छी होने से लगातार नई खेप आने की उम्मीद है। बाहरी व्यापारी भी संपर्क में हैं। व्यापारियों का कहना है कि मार्च में बंगनपल्ली, तोतापरी सहित अन्य किस्में भी बाजार में आने लगेंगी, जिससे ग्राहकों को अधिक विकल्प मिलेंगे। दूसरी ओर, आम के पेड़ों में मंजर आ चुके हैं और देशभर में इस वर्ष अच्छी पैदावार की संभावना जताई जा रही है। भास्कर एक्सपर्ट- डॉ. प्रो. सयंत मिश्रा, बीएयू मंजर पर इंसेक्टिसाइड व सल्फर का करें छिड़काव बिरसा कृषि विवि के डॉ. प्रो. सयंत मिश्रा ने बताया कि अब आम और लीची के मौसम की शुरुआत हो रही है। पेड़ों में मंजर लग चुके हैं, हालांकि वे अभी पूरी तरह खुले नहीं हैं। इस अवस्था में मंजर पर कीट व रोग से बचाव के लिए इंसेक्टिसाइड और सल्फर का छिड़काव करना आवश्यक है, ताकि फल स्वस्थ और गुणवत्तापूर्ण विकसित हो सकें। आम में ‘ऑल्टरनेट बेयरिंग’ की प्रवृत्ति पाई जाती है यानी एक वर्ष अच्छी उपज के बाद अगले वर्ष उत्पादन कम हो सकता है। पिछले साल झारखंड में आम की फसल बेहतर रही थी, इसलिए इस बार उत्पादन कम रहने की संभावना है। जिन बागानों में बीते वर्ष फलन कम हुआ था, वहां इस साल अच्छी होगी। आम्रपाली और मल्लिका जैसी उन्नत किस्मों के उत्पादन पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा, जबकि दक्षिण भारत से आम की आवक हर वर्ष पहले शुरू हो जाती है। अन्य राज्यों से आने वाले आम की फसल अच्छी होने की उम्मीद है।

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