जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय में मंगलवार को जारी एक आदेश ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। रजिस्ट्रार गुंजन सोनी ने आदेश जारी किया है, जिसमें शिक्षकों को निर्देशित किया गया है कि वे विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में किसी कमरे में अशैक्षणिक कर्मचारियों से विमर्श नहीं करेंगे। यदि किसी शिक्षक को किसी विषय पर चर्चा करनी हो, कोई समस्या हो या कोई बिंदु प्रशासन के संज्ञान में लाना हो तो वह कुलपति या रजिस्ट्रार से विमर्श करेगा। प्रदेश में इस तरह का आदेश निकालने का यह पहला मामला माना जा रहा है, जिसका अब शिक्षक विरोध कर रहे हैं। शिक्षकों ने कुलपति प्रो. मदनमोहन झा को ऐसे आदेश को निरस्त करने के लिए पत्र लिखा है। राज्यपाल को लिखेंगे पत्र
“विश्वविद्यालय विमर्श की स्वतंत्रता के लिए होते हैं। ऐसा विवादित आदेश वापस लेना होगा। हम राज्यपाल और मुख्यमंत्री को ज्ञापन देंगे।”
-शास्त्री कोसलेंद्रदास, सहायक आचार्य, दर्शन विभाग “यूनिवर्सिटी में लंबे समय से भर्तियां नहीं हुई है, जिसकी वजह से स्टाफ कम है। स्टाफ विचार-विमर्श में ही उलझा रहता है, जिससे काम अटक जाते हैं, इसलिए यह आदेश निकाला गया है, ताकि शिक्षक सीधा कुलगुरु या रजिस्ट्रार से विमर्श करें और काम चलते रहें।”
-प्रो. मदन मोहन झा, कुलगुरु


