सुबह इलाज की उम्मीद लेकर लोग अस्पताल पहुंचे,… लेकिन सामने थीं लंबी कतारें, बंद पड़े काउंटर और स्क्रीन पर घूमता हुआ ‘लोडिंग’ का निशान। सरकार का इंटीग्रेटेड हेल्थ मैनेजमेंट सिस्टम (IHMS) मंगलवार को मरीजों के लिए परेशानी बन गया। सर्वर की स्लो स्पीड के कारण एसएमएस सहित प्रमुख अस्पतालों में आउटडोर-इनडोर सेवाएं घंटों ठप रहीं। एसएमएस में सुबह 11 बजे से 3 बजे तक हालात बिगड़े रहे। ओपीडी पर्ची, भर्ती और डिस्चार्ज की प्रक्रिया अटक गई। बाद में राहत देने के लिए अस्पताल प्रशासन ने ओपीडी का समय दो घंटे बढ़ाया। जेके लोन, महिला चिकित्सालय सांगानेरी गेट और जनाना अस्पताल चांदपोल में भी ओपीडी-आईपीडी प्रभावित रही। पिछले 5 दिन में दूसरी बार सर्वर स्लो होने से अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी सी रही। एसएमएस के धन्वन्तरि ओपीडी और चरक भवन में रजिस्ट्रेशन काउंटर, सेंट्रल लैब, डिस्चार्ज काउंटर और भर्ती काउंटरों पर मरीजों की लंबी लाइनें लग गईं। कई लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ा। सर्वर डाउन था, मगर नई व्यवस्थाएं कीं “अधीक्षक के निर्देशानुसार जांचों के लिए बिना बिल की पर्ची काटने, 5 दिन की दवा देने और दो घंटे समय भी बढ़ा दिया था।” -डॉ. अनिल दुबे, उप अधीक्षक, एसएमएस “तकनीकी खामी के कारण सर्वर स्लो के चलते परेशानी हुई। मरीजों को राहत देने के लिए अलग से व्यवस्था करनी पड़ी।” -डॉ. आर.एन. सेहरा, अधीक्षक, जेके लोन निगम में जन्म, मृत्यु, विवाह प्रमाण पत्र भी नहीं बने अस्पतालों से लेकर निगम, जेडीए, आरटीओ और अन्य सरकारी महकमों में मंगलवार को सर्वर ठप हो गया, जिससे सामान्य कामकाज के लिए भी लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। सुबह से ही सर्वर नहीं चलने से विभागों में लंबी लाइनें लग गई। नगर निगमों में जन्म, मृत्यु और विवाह प्रमाण पत्र से जुड़े जरूरी काम भी रुक गए। भामाशाह स्टेट डेटा सेंटर के जॉइंट डायरेक्टर देवेंद्र शर्मा ने कहा कि सर्वर की नहीं नेटवर्क की प्रॉब्लम थी,जो 3 बजे सही हो गई थी। क्या है IHMS?
सरकारी अस्पतालों में लागू IHMS के तहत आउटडोर-इनडोर में मरीज का नंबर, नाम और डिटेल दर्ज करते ही उसकी पूरी जानकारी कंप्यूटर स्क्रीन पर आ जाती है। इसका उद्देश्य था- मरीजों को सटीक इलाज, बेहतर ट्रैकिंग और सुविधाओं में पारदर्शिता, लेकिन तकनीकी खामियों के कारण यही सिस्टम कई बार रुकावट बन रहा है।


