मुख्यमंत्री साय ने दी 156 करोड़ की सौगात:बैकुंठपुर में खुला 30 बेड वार्ड, 144 कामों का लोकार्पण और भूमिपूजन

कोरिया महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 156 करोड़ रुपए से अधिक के विकास कार्यों की सौगात दी। इस दौरान उन्होंने करोड़ों के कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया। मुख्यमंत्री ने कुल 144 निर्माण कार्यों की आधारशिला रखी और पूर्ण हो चुके कार्यों का उद्घाटन किया। उन्होंने 70 करोड़ रुपए की लागत वाले 104 कार्यों का उद्घाटन और 85.54 करोड़ रुपए की लागत वाले 40 नए कार्यों का भूमिपूजन किया।मुख्यमंत्री ने विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत हुए कार्यों का विस्तार किया। इसमें सोनहत, रजौली और तामडाड़ जलाशयों के जीर्णोद्धार से हजारों किसानों को अब बेहतर सिंचाई सुविधा मिलेगी, सरभोका, सावरावा, उमझर, सरडी और घुघरा में महतारी सदनों का लोकार्पण किया गया। इसके साथ ही 15 नए आंगनबाड़ी भवनों की शुरुआत हुई और मनोरंजन के लिए ओपन थिएटर, मिनी स्टेडियम और सुरक्षा के लिए हाई मास्क लाइट जैसी सुविधाओं का उद्घाटन शामिल है। जिले के सामाजिक ढांचे को मजबूत करने के लिए सीएम ने प्रमुख घोषणाएं और उद्घाटन किए, इसमें बैकुंठपुर में 30 बिस्तरों वाला पेडिएट्रिक वार्ड (बाल रोग विभाग) शुरू, हायर सेकेंडरी स्कूल भवन और आधुनिक नालंदा परिसर की सुविधा और तीन बड़े पुलों और सड़कों का शिलान्यास, शामिल है। देवभोग के चावल से जगन्नाथ मंदिर का है पुराना रिश्ता: साय महाशिवरात्रि पर चिरमिरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर परिसर भक्ति, उत्साह और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहा। इस अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तीन दिवसीय मेले में सम्मिलित होने पहुंचे। शंखनाद और जय जगन्नाथ के उद्घोष के बीच मुख्यमंत्री ने भगवान के दर्शन किए और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर आगमन पर प्रबंधन समिति और पुजारियों ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया। अंगवस्त्र और चंदन तिलक के साथ परंपरा अनुसार उनका अभिनंदन किया गया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने यज्ञशाला में बैठकर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आहुति दी। उन्होंने बाबा पुरुषोत्तम पुरी महाराज की कुटिया पहुंचकर उनका आशीर्वाद लिया और कहा कि संतों का मार्गदर्शन ही समाज को नैतिक शक्ति और जनसेवा की प्रेरणा देता है। मुख्यमंत्री के दौरे का सबसे खास पल वह रहा जब उन्होंने बिना किसी वीआईपी औपचारिकता के आनंद बाजार में आम श्रद्धालुओं के साथ जमीन पर बैठकर महाप्रसाद ग्रहण किया। उनकी इस सादगी ने सामाजिक समरसता और समानता का बड़ा संदेश दिया। मंदिर समिति ने उन्हें स्मृति चिन्ह के रूप में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की प्रतिमा भेंट की। मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ और भगवान जगन्नाथ के प्राचीन संबंधों का जिक्र किया। उन्होंने कहा प्राचीन काल से ही छत्तीसगढ़ की पवित्र भूमि देवभोग से भगवान जगन्नाथ के लिए चावल भेजने की परंपरा रही है।। मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के लिए 127 करोड़ रुपए के विकास कार्यों की घोषणा की। उन्होंने मंदिर की बाउंड्री वॉल निर्माण और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के विस्तार का भी भरोसा दिलाया।

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