जिला अस्पताल से अब प्रसूताओं की रेफर रेट शून्य हो गई है। अस्पताल में पिछले साल 12 हजार 434 प्रसूताओं के सुरक्षित प्रसव करवाए। इनमें से 3513 प्रसूताओं के सिजेरियन से प्रसव हुए। 24 घंटे संचालित ओटी में दिन-रात गंभीर प्रसूताओं व महिलाओं के ऑपरेशन किए जा रहे हैं। पिछले साल महिलाओं के 662 मेजर व 268 माइनर ऑपरेशन किए गए। बच्चेदानी में गांठ के लिए हिस्टरेक्टॉमी, ओवेरियन सिस्ट, प्रोलैप्स, एनडीवीएच (नॉन-डिसेंट वेजाइनल हिस्टेरेक्टॉमी), हर्निया में मेश (जाली) लगाने सहित सभी प्रकार से जटिल ऑपरेशन किए गए। गर्भाशय को निकालने की सर्जरी गर्भाशय फाइब्रॉएड, एडिनोमायोसिस और एंडोमेट्रियोसिस, महावारी में अनियमितता, कम उम्र में बच्चेदानी के बाहर आने सहित ऑपरेशन किए जा रहे हैं। पिछले साल महज 4 प्रसूताओं को मल्टीपल ऑर्गन फेलियर होने और यहां न्यूरो फिजीशियन, नेफ्रोलोजिस्ट डॉक्टर नहीं होने की स्थिति में हाई सेंटर रेफर किया। पिछले माह अस्पताल में 1038 प्रसव करवाए। इनमें से 358 महिलाओं के सिजेरियन किए। अस्पताल की एमसीएच विंग गायनिक व पीडिया दोनों विभाग के 100 बेड की क्षमता के साथ बनाई थी, लेकिन आस-पास के क्षेत्रों से बढ़ते मरीजों और गंभीर केसों के दबाव के चलते यहां गायनिक विभाग के ही 130 बेड हैं। वार्ड हमेशा फुल रहते हैं। स्थिति यह है कि कई बार जगह कम पड़ने पर एक बेड पर दो-दो महिला मरीजों को भर्ती कर उनका इलाज किया जा रहा है ताकि कोई भी बिना इलाज के वापस न लौटे। विंग में लेबर रूम (20 बेड), पोस्ट नेटल (18 बेड), दो पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड (48 बेड) और पीएनसी वार्ड (44 बेड) हैं। विभाग की ओपीडी रोजाना 150 से 200 मरीजों की है और प्रतिदिन 50 से 80 मरीज भर्ती किए जा रहे हैं। लेबर रूम में महज 6 लेबर टेबल और 1 सेप्टिक टेबल है। वहीं, ऑपरेशन थिएटर में सिर्फ दो टेबल हैं। इसके बावजूद डॉक्टरों की टीम रोजाना 35 से 40 सुरक्षित प्रसव और 14-15 सिजेरियन/जटिल ऑपरेशन कर रही है। फिलहाल विंग में ही गायनिक विभाग ने माइनर ओटी शुरू कर दी है। अब प्रसूताओं को अपने टांके खुलवाने या छोटे ऑपरेशनों के लिए न्यू टीचिंग बिल्डिंग के चक्कर नहीं काटने पड़ रहे हैं। “लेबर रूम में रोजाना 35-40 सुरक्षित प्रसव करवाए जाते हैं। हमारी टीम ओटी में 14-15 सिजेरियन कर रही है। प्रसूताओं और महिलाओं के सभी प्रकार के मेजर व माइनर सफल ऑपरेशन किए जा रहे हैं। पूरी टीम की मेहनत का ही नतीजा है कि पिछले साल रेफर रेट करीब शून्य रही है।” – प्रोफेसर डॉ. कमला वर्मा, गायनिक विभागाध्यक्ष


