मध्य प्रदेश के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा बुधवार को राज्य का तीसरा बजट पेश करेंगे। मिनी पंजाब कहे जाने वाले हरदा जिले के किसानों ने सरकार से बजट में अपनी मांगों को शामिल करने की अपील की है। ग्राम सुखरास के किसानों का कहना है कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए गेहूं का समर्थन मूल्य 3000 रुपये प्रति क्विंटल किया जाना चाहिए। वर्तमान में किसानों को उपज की लागत भी नहीं मिल पा रही है, जिससे कृषि घाटे का सौदा बन गई है। आपदा के समय किसानों को उनकी फसल के नुकसान का एक समान मुआवजा मिलना चाहिए। किसानों के खातों से समान प्रीमियम काटा जाता है, लेकिन बीमा और मुआवजा राशि अलग-अलग दी जाती है, जिसमें एकरूपता होनी चाहिए। खेत सड़क योजना शुरू करने की मांग
किसानों को अपने खेतों तक पहुंचने में परेशानी होती है। गांव के पास खेत होने के बावजूद कई किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है, और बारिश में खेतों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। इसलिए, सरकार को मुख्यमंत्री खेत सड़क योजना फिर से शुरू करनी चाहिए ताकि किसानों का आवागमन बाधित न हो। जिन क्षेत्रों में नहर के पानी की व्यवस्था नहीं है, वहां सहित हर गांव में सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने पर ध्यान देना चाहिए। इससे बिजली की समस्या कम होगी और किसानों को कम लागत में बिजली मिल पाएगी। इसके लिए सौर ऊर्जा पर सब्सिडी बढ़ाई जानी चाहिए। खाद वितरण प्रणाली सुधारने की मांग
किसानों को लंबी लाइनों में लगने के बावजूद पर्याप्त मात्रा में खाद नहीं मिल पाती है। खाद वितरण प्रणाली में सुधार कर हर गांव में खाद वितरण केंद्र बनाए जाने चाहिए, जिससे किसानों का समय और पैसा बच सके। स्थानीय विधायक डॉ. आर.के. दोगने ने कहा कि भाजपा सरकार में प्रदेश पर लगातार कर्ज बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि बजट सत्र से ठीक पहले एक हफ्ते में दूसरी बार 5,000 करोड़ रुपये का कर्ज लेना गंभीर मामला है। देश के कुल कर्ज का लगभग पांच प्रतिशत अकेले मध्य प्रदेश पर है, जो चिंताजनक स्थिति है। सरकार को अपनी वित्तीय दिशा पर फिर से विचार करना चाहिए।


