राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (आरएसआरटीसी) ने उदयपुर बस स्टैंड के व्यापक पुनर्विकास की तैयारी शुरू कर दी है। पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर तैयार इस योजना के तहत उदयपुर बस अड्डे को आधुनिक ट्रांजिट हब के रूप में विकसित किया जाएगा। प्रदेश के 7 अन्य शहरों का भी रेनोवेशन प्रस्तावित है। इसमें 100 से 300 करोड़ तक के निवेश का अनुमान है। शहर में उदियापोल स्थित बस स्टैंड का पुनर्विकास 16,788 वर्गमीटर क्षेत्र में प्रस्तावित है। शहर की पर्यटन पहचान और यात्रियों की भारी आवाजाही को देखते हुए इसे विशेष रूप से हाईटेक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। डिपो मैनेजर हेमंत शर्मा के अनुसार नए प्लान में ग्राउंड फ्लोर पर बसों की आवाजाही और यात्रियों के लिए सुव्यवस्थित प्लेटफॉर्म होंगे। पहली मंजिल पर रोडवेज के प्रशासनिक कार्यालय बनाए जाएंगे। इसके ऊपर की मंजिलों पर होटल, मॉल, सिनेमा, प्राइवेट ऑफिस और कॉमर्शियल दुकानें विकसित की जा सकेंगी। पर्यटकों की भारी आवाजाही को देखते हुए डिजिटल सूचना प्रणाली, आधुनिक वेटिंग हॉल, बेहतर पार्किंग और खान-पान की उन्नत सुविधाओं पर खास जोर रहेगा। उद्देश्य यह है कि सैलानियों को बस स्टैंड पर ही विश्वस्तरीय सुविधाएं मिल सकें। प्रोजेक्ट में ये शहर भी चित्तौड़गढ़, बीकानेर, भरतपुर, भीलवाड़ा, ब्यावर, अजमेर और बूंदी। 9 कंपनियों ने प्रस्ताव दिए, निर्णय अगले सप्ताह संभव, फिर टेंडर और काम
मुख्यालय जयपुर से रुचि अभिव्यक्ति (ईओआई) मंगाई गई थी, जिसमें 9 बड़ी डेवलपर कंपनियों ने प्रस्ताव दिए हैं। कंपनियों ने बस अड्डों को आधुनिक स्वरूप देने के सुझाव भी सरकार को सौंपे हैं। इस मेगा प्रोजेक्ट में 100 से 300 करोड़ रुपये तक के निवेश का अनुमान है। फिलहाल जयपुर में प्राप्त प्रस्तावों पर विचार-विमर्श जारी है। एक कमेटी पहले बिडर्स की योग्यता की जांच करेगी, इसके बाद प्रस्तावों पर अंतिम मंथन होगा। अगले सप्ताह फाइनल प्लान सरकार को भेजा जाएगा। मंजूरी मिलते ही टेंडर जारी कर काम शुरू कर दिया जाएगा। इस परियोजना के पूर्ण होने के बाद बस अड्डे केवल यात्रा का माध्यम नहीं, बल्कि व्यावसायिक और सुविधाजनक शहरी केंद्र के रूप में विकसित होंगे।


