भाईजान चाट वाले ने ‘जय माता दी’ लिखकर गुपचुप बेचा:निगम से मिला था परमिशन, ग्रामीण बोले- हिंदूओं को धोखा देकर व्यापार करना गलत

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के देवबलौदा चरोदा स्थित 13वीं शताब्दी के प्राचीन शिव मंदिर में महाशिवरात्रि पर सदियों से मेला लग रहा है। लेकिन इस साल 15 फरवरी को मेले में विवाद की स्थिति बन गई। दरअसल मेले में भाईजान चाट वाले ने नाम बदलकर ‘जय माता दी’ लिखवाया था और लोगों को गुपचुप खिला रहा था। बजरंग दल वालों को इसकी भनक लगी तो थूक और मूत्र जिहाद का आरोप लगाते हुए मौके पर पहुंचकर चाट गुपचुप फेंकवा दिया। विवाद बढ़ने पर मेले में 75% मुस्लिमों को बाहरी बताते हुए सभी की दुकाने बंद करवा दी। दैनिक भास्कर की टीम अगले दिन शहर से 20 किलोमीटर दूर उस जगह पर पहुंची, जहां बजरंग दल ने मुस्लिमों की दुकाने बंद कर हंगामा किया था। स्थानीय लोगों ने नाम बदलकर दुकान लगाने का विरोध किया, दुकानदारों का कहना है कि निगम से रसीद मिलने के बाद दुकाने लगाई गई थी। हालांकि बिना नाम आईडी के कैसे परमिशन दी गई इस पर भी सवाल खड़े हो रहे। इधर इस विवाद के बाद रायपुर नगर निगम ने शहर में लगने वाले संडे बाजार में दुकान लगाने वाले प्रत्येक फेरीवाले को अपना वैध पहचान पत्र जमा करना अनिवार्य कर दिया है।
देवबलौदा स्थित शिव मंदिर में गांव का माहौल सामान्य था। लोग अपने रोजमर्रा के काम में लगे हुए थे। गांव में किसी तरह की चर्चा नहीं थी। ज्यादातर ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें इस विवाद की जानकारी सोशल मीडिया और खबरों के माध्यम से मिली। स्थानीय लोगों का कहना है कि सालों से मेले में हिंदू और मुस्लिम दोनों दुकान लगाते रहे हैं। लेकिन ऐसा विवाद पहली बार हुआ है। ग्रामीणों ने बताया कि मेले में दुकान लगाने वाले करीब 95 प्रतिशत व्यापारी बाहर से आते हैं। उन्होंने कहा कि गांव के स्थानीय लोग आमतौर पर मेला में दुकान नहीं लगाते। वहीं, दुकानदार ने कहा कि वह पिछले तीन सालों से लगातार शिवरात्रि मेले में दुकान लगाता आ रहा है। जिसने उसे गुपचुप-चाट का काम सिखाया, उसी व्यक्ति ने दुकान का नाम और बैनर भी बनवाकर दिया था। मेले में क्या हुआ था? गांव में महाशिवरात्रि पर मेला लगा था। जहां बड़ी संख्या में मुस्लमानों ने भी दुकानें लगाई थी। 15 फरवरी को बजरंग दल ने धर्म पूछकर उनसे गाली-गलौज की, फिर उनकी दुकानें बंद करवा दी। बजरंग दल ने मुस्लिम व्यापारियों पर पहचान छिपाकर व्यापार करने का आरोप लगाया। विवाद एक गुपचुप चाट वाले से शुरू हुआ। एक मुस्लिम गुपचुप वाले के ठेले में अजीत चाट भंडार और जय माता दी लिखा था। लेकिन जब ऑनलाइन पेमेंट करने के लिए क्यूआर कोड स्कैन किया तो उसका नाम भाईजान चाट वाला आया। बजरंग दल ने थूक और मूत्र जिहाद का आरोप लगाते हुए दुकानदारों को हटवा दिया। भाईजान चाट वाला बोला- रसीद कटवाई फिर दुकान लगाया मेले में जिस व्यक्ति ने नाम बदलकर ठेला लगाया था, वह दुकानदार मोहम्मद इस्हाक है। बजरंग दल के हंगामे के बाद नगर निगम ने इसके दुकान के सामान को जब्त कर लिया था। जिसे बाद में लौटा दिया गया। इस्हाक ने बताया कि वह गांव के लिए नया नहीं है। वह यहां के व्यापारियों से ही चाट-गुपचुप बनाने की सामग्री लेता है। गांव के लोग उसे जानते हैं। उसने कहा कि वह पिछले तीन सालों से लगातार शिवरात्रि मेले में दुकान लगाता आ रहा है। जिसने उसे गुपचुप-चाट का काम सिखाया, उसी व्यक्ति ने दुकान का नाम और बैनर भी बनवाकर दिया था। मोहम्मद इस्हाक ने बताया कि वह खुर्सीपार का रहने वाला है और अलग-अलग जगहों के मेलों में दुकान लगाता है। उसने कहा कि देवबलौदा में मेला का ठेका नगर निगम की ओर से होता है। इस साल भी दुकान लगाने के लिए निगम में 300 रुपए की रसीद कटवाई थी। इस्हाक ने कहा कि उसका उद्देश्य सिर्फ व्यापार करना है और आगे से वह अपने असली नाम से ही दुकान लगाएगा। ‘मुस्लिमों से कोई दिक्कत नहीं, नाम छिपाना गलत’ दैनिक भास्कर डिजिटल ने गांव के स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों से बातचीत की। किसी भी ग्रामीण ने विवाद का समर्थन नहीं किया। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में करीब 100 के आसपास मुस्लिम आबादी रहती है और आज तक किसी तरह का विवाद नहीं हुआ। लोगों का कहना है कि मेले में हर साल बाहर से व्यापारी आते हैं, लेकिन नाम बदलकर या पहचान छिपाकर व्यापार करना गलत है। जानिए गांव के लोगों ने क्या कहा? गोविंद यादव ने बताया कि शाम को जानकारी मिली कि एक मुस्लिम व्यक्ति हिंदू नाम से व्यवसाय कर रहा था। जब पेमेंट हो गया तब पता चला, इसके बाद लोगों ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि महाशिवरात्रि के दौरान कई लोग उपवास रखते हैं और सावधानी बरतते हैं, इसलिए पहचान छिपाकर व्यापार करना गलत है। इसके बाद बजरंग दल के लोगों को बुलाया गया। पुलिस और प्रशासन भी मौके पर पहुंच गया। गांव में पहले कभी ऐसा विवाद नहीं हुआ। हर साल मेले में कोई न कोई विवाद हो जाता है रेखा बाई श्रीवास ने बताया कि वह पिछले 75 सालों से यहां रह रही हैं। उनके अनुसार मेला में पहले भी हत्या और चाकूबाजी जैसी घटनाएं हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि हर साल मेला खत्म होने के समय किसी न किसी बात पर विवाद हो जाता है। विवाद करने वालों में गांव के लोग भी रहते हैं और बाहर के लोग भी। गांव में कभी ऐसी स्थिति नहीं बनी कुंभकरण साहू ने बताया कि देवबलौदा में महाशिवरात्रि मेला सदियों से लग रहा है। उन्होंने कहा कि वह मंदिर के बाहर पिछले तीन-चार सालों से रोजाना दुकान लगाते हैं और मेले में भी वर्षों से दुकान लगा रहे हैं, लेकिन गांव में पहले कभी ऐसा माहौल नहीं बना। मेला का ठेका निगम के माध्यम से होता है। हिंदू-मुस्लिम दोनों व्यापार करें, कोई दिक्कत नहीं महादेव सेवा संगठन के अध्यक्ष रोहित यादव ने कहा कि महाशिवरात्रि के मेले में हर साल हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग दुकान लगाते हैं। हमें इस बात से कोई आपत्ति नहीं है। हम चाहते हैं कि मेले में हिंदू भी व्यापार करें और मुस्लिम भी व्यापार करें, सभी को बराबर अधिकार मिले। लेकिन कल हमें जानकारी मिली कि एक व्यक्ति ने अपना नाम छिपाकर व्यापार किया, जो गलत है। हमारा बस इतना कहना है कि अगर कोई हिंदू है तो वह हिंदू नाम से व्यापार करे और अगर कोई मुस्लिम है तो मुस्लिम नाम से। किसी को भी अपनी पहचान छिपाकर व्यापार करने की जरूरत नहीं है। लोग अपने वास्तविक नाम और पहचान के साथ ही व्यापार करें, हमें इससे कोई दिक्कत नहीं है। मेले में दुकान लगाने वाले अधिकतर व्यापारी स्थानीय नहीं हैं, बल्कि बाहर से आए हुए हैं। हमें इससे भी कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन किसी को भी नाम छिपाकर धोखे से व्यापार नहीं करना चाहिए। टीआई ने समझाया, अपने नाम से दुकान चलाओ अजीत चाट सेंटर के संचालक मोहम्मद इस्हाक ने कहा कि टीआई साहब मौके पर पहुंचे और उन्होंने हमें समझाया। उन्होंने पूछा कि आप नाम बदलकर दुकान क्यों चला रहे हैं। टीआई साहब ने कहा कि दुकान में “जय माता दी” लिखवाने की जरूरत नहीं थी, दुकान में अपने वास्तविक नाम का ही बैनर लगाइए। इस पर मैंने उन्हें बताया कि मुझे जिस व्यक्ति ने यह काम सिखाया था, उसी ने बैनर बनवाकर दिया था। तभी से उसी नाम के बैनर के साथ दुकान चल रही है। मैं खुद खुर्सीपार का रहने वाला हूं और पिछले दो-तीन साल से लगातार इसी मेले में दुकान लगाता आ रहा हूं। मैंने यह भी बताया कि नगर निगम की ओर से दुकान के नाम से रसीद भी काटी गई थी। यह रसीद अजीत के नाम पर 300 रुपये की बनी थी। मौदहापारा में संडे बाजार लगाने के लिए दिखानी होगी ID इधर, इस विवाद के बाद रायपुर के मौदहापारा में लगने वाले संडे बाजार में दुकान लगाने वाले प्रत्येक फेरीवाले को अपना वैध पहचान पत्र रायपुर नगर निगम में जमा करना अनिवार्य कर दिया गया है। बिना आईडी के किसी को भी बाजार में व्यवसाय करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। महापौर मीनल चौबे ने नगर निवेश विभाग के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि बाजार को व्यवस्थित किया जाए, सड़क यातायात सुगम बनाया जाए और केवल स्थानीय फेरीवालों को ही दुकान लगाने की अनुमति मिले। पढ़ें पूरी खबर… …………………… इससे जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… बजरंगदल ने धर्म पूछकर बंद कराई मुस्लिमों की दुकान, VIDEO: जय माता दी लिखकर चाट बेच रहा था, गाली-गलौज की, कहा- मुसलमान होना तुम्हारी गलती छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में महाशिवरात्रि पर मेला लगाया गया, जहां बड़ी संख्या में मुस्लमानों ने भी दुकानें लगाई। बजरंग दल ने धर्म पूछकर उनसे गाली-गलौज की, फिर उनकी दुकानें बंद करवा दी। बजरंग दल ने मुस्लिम व्यापारियों पर पहचान छिपाकर व्यापार करने का आरोप लगाया। पढ़ें पूरी खबर…

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