छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दूसरी शादी या चूड़ी प्रथा से विवाह और भरण-पोषण को लेकर महत्वपूर्ण फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा है कि केवल दूसरी शादी या चूड़ी विवाह के आरोपों के आधार पर पत्नी को भरण-पोषण के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। इस फैसले के साथ ही हाईकोर्ट ने पति की याचिका खारिज कर दी है। दरअसल, जशपुर जिले के रहने वाले युवक की शादी उसी जिले की युवती के साथ 2009 में हुई थी। शादी के बाद पति-पत्नी की तीन बेटियां भी हैं। बेटी होने के बाद से पति-पत्नी के बीच विवाद शुरू हो गया। आरोप है कि पति ने अपनी पत्नी को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। फिर बाद में उसने किसी दूसरी महिला को पत्नी बनाकर रख लिया। साथ ही पत्नी को घर से निकाल दिया। पत्नी भरण-पोषण देने फैमिली कोर्ट का आदेश
पति के घर से निकालने के बाद परेशान महिला ने फैमिली कोर्ट में परिवाद प्रस्तुत की, जिसमें उन्होंने हिंदू विवाह अधिनियम के तहत भरण-पोषण दिलाने की मांग की। जशपुर के फैमिली कोर्ट ने सभी साक्ष्यों, दस्तावेजों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद पति को आदेश दिया कि वो अपनी पत्नी को गुजारा भत्ता दे। पति ने फैमिली कोर्ट के आदेश के खिलाफ की अपील
इस पर पति ने फैमिली कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील की। पति ने तर्क दिया कि उसकी पत्नी ने अपनी इच्छा से घर छोड़ा है। जिसके बाद वह बिहार में एक व्यक्ति के साथ चूड़ी विवाह कर लिया है। इसलिए वह भरण-पोषण की हकदार नहीं है। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने कहा है कि केवल दूसरी शादी या चूड़ी विवाह के आरोपों के आधार पर पत्नी को भरण-पोषण के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। फैमिली कोर्ट ने सभी साक्ष्यों, दस्तावेजों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद ही भरण-पोषण देने का आदेश दिया है। इसलिए फैमिली कोर्ट के आदेश को अवैध नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने पति की अपील को खारिज कर दी है।


