माउंट आबू में नक्की झील बोटिंग टेंडर रद्द:हाईकोर्ट ने कहा- ऊंचे बेस रेट से प्रतिस्पर्धा रोकना मनमाना और अवैध

राजस्थान हाईकोर्ट ने माउंट आबू की प्रसिद्ध नक्की झील में बोटिंग सर्विस चलाने के लिए जारी टेंडर प्रक्रिया को रद्द कर दिया है। जस्टिस सुनील बेनीवाल की एकल पीठ ने मंगलवार को इस मामले में रिपोर्टेबल जजमेंट सुनाते हुए नगर पालिका माउंट आबू को निर्देश दिया है कि वह दो माह के भीतर कानून सम्मत नई निविदा प्रक्रिया संपन्न करे। कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट टिप्पणी की कि निविदा में अत्यधिक ऊंचा बेस रेट तय करना और एकल निविदा होने के बावजूद बिना ठोस कारणों के उसे स्वीकार करना पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा के सिद्धांतों का उल्लंघन है। दरअसल, नक्की झील में वर्ष 2025-2028 के लिए बोटिंग सेवाओं के लिए नगर पालिका ने निविदा आमंत्रित की थी। याचिकाकर्ता फर्म ‘मैसर्स उज्जैन ड्रीम्स’ की बिड को तकनीकी रूप से अयोग्य घोषित कर दिया गया था, जबकि ‘मैसर्स कोरल एसोसिएट्स उदयपुर’ की इकलौती बिड को स्वीकार कर उसे प्रोविजनल कार्य आदेश जारी कर दिया गया। याचिकाकर्ता ने इसे पक्षपातपूर्ण और आरटीपीपी एक्ट के विरुद्ध बताते हुए चुनौती दी थी। एकल निविदा पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी मामले की सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि तकनीकी बिड में केवल प्रतिवादी संख्या 4 कोरल एसोसिएट्स ही योग्य पाई गई थी। राजस्थान पारदर्शिता लोक उपापन नियम के अनुसार, यदि केवल एक बिड शेष बचती है, तो खरीद संस्था को प्रतिस्पर्धा की कमी के कारणों की जांच करनी चाहिए और एक ‘जस्टिफिकेशन नोट’ तैयार करना चाहिए। कोर्ट ने जब टेंडर रिकॉर्ड का बारीकी से अध्ययन किया, तो पाया कि: खरीद समिति ने नियम 68 की पालना में कोई ‘जस्टिफिकेशन नोट’ तैयार नहीं किया था। वित्त/लेखा सदस्य के विचारों को स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं किया गया, जो कि जरूरी प्रक्रिया है। अधिकारियों ने बिना किसी ठोस आधार के “सर्वसम्मति” के नाम पर निविदा स्वीकृत कर ली। अदालत ने इसे प्रक्रियात्मक अनियमितता करार देते हुए कहा कि जब बिड की दरें बेस रेट से बहुत कम थीं, तो अधिकारियों को अधिक सावधानी बरतनी चाहिए थी। बेस रेट के निर्धारण में मनमानी कोर्ट ने इस बात पर हैरानी जताई कि माउंट आबू नगर पालिका ने इस निविदा के लिए 7 करोड़ 61 लाख रुपये का बेस रेट तय किया था। रिकॉर्ड के अनुसार, पिछले दो टेंडरों में भी कोई भी बिड बेस रेट के बराबर नहीं आई थी। वर्ष 2019-22 में 7.65 करोड़ के बेस रेट के मुकाबले 4.61 करोड़ की बिड स्वीकृत हुई थी। वर्ष 2022-25 में 8 करोड़ के बेस रेट के मुकाबले 5.71 करोड़ की बिड मिली थी। जस्टिस बेनीवाल ने कहा कि जब अधिकारी जानते थे कि बाजार में इस दर पर प्रतिभागी नहीं मिल रहे हैं, तो जानबूझकर ऊंचा बेस रेट रखना संभावित बोलीदाताओं को हतोत्साहित करने जैसा है। यह आरटीपीपी अधिनियम, 2012 की धारा 4 के खिलाफ है, जो प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने का दायित्व सौंपती है। याचिकाकर्ता की अयोग्यता पर कोर्ट का रुख हालांकि, कोर्ट ने याचिकाकर्ता फर्म की उस दलील को खारिज कर दिया जिसमें उसने खुद को योग्य बताया था। कोर्ट ने पाया कि निविदा की शर्त संख्या 7 के अनुसार 3 वर्ष का सरकारी अनुभव अनिवार्य था। याचिकाकर्ता ने एक अन्य फर्म के साथ साझेदारी के आधार पर अनुभव का दावा किया था, जिसे कोर्ट ने निविदा शर्तों के अनुरूप नहीं माना। लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल याचिकाकर्ता के अयोग्य होने से पूरी प्रक्रिया की अवैधता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट के निर्देश और नई निविदा अदालत ने अपने अंतिम फैसले में निम्नलिखित निर्देश दिए हैं: नक्की झील बोटिंग के लिए जारी वर्तमान निविदा को तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाता है। नगर पालिका माउंट आबू को आदेश दिया गया है कि वह दो महीने के भीतर पूरी तरह से कानून सम्मत नई निविदा प्रक्रिया संपन्न करे। नई निविदा में बेस रेट और अन्य नियम व शर्तें तकनीकी विशेषज्ञता और बाजार की वास्तविक स्थिति को ध्यान में रखकर तय की जाएं। अदालत ने ‘पब्लिक ट्रस्ट डॉक्ट्रिन’ का हवाला देते हुए कहा कि राज्य प्राकृतिक संसाधनों का पूर्ण स्वामी नहीं, बल्कि ट्रस्टी है और उसे इन संसाधनों का आवंटन बिना किसी पक्षपात या मनमानी के करना चाहिए।

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