झुंझुनूं जिले में सरसों की बम्पर पैदावार को देखते हुए कृषि विभाग किसानों को सीधे उद्यमी बनाने की तैयारी में जुट गया है। राज्य सरकार की नई तेल मिल सब्सिडी योजना के तहत अब किसान और युवा गांव में ही कच्ची घाणी इकाई स्थापित कर सकेंगे। मशीनरी लागत का 33% यानी अधिकतम 9.90 लाख रुपए तक अनुदान मिलेगा। 10 टन प्रतिदिन क्षमता तक की इकाई पर लागू इस योजना से किसान, FPO और युवा खुद सरसों का तेल तैयार कर बेच सकेंगे। इससे किसानों को अपनी उपज बिचौलियों को औने-पौने दामों में बेचने की मजबूरी नहीं रहेगी और वे खुद सरसों का तेल तैयार कर बाजार में बेचकर अधिक मुनाफा कमा सकेंगे। मशीनरी पर 33% अनुदान, अधिकतम 9.90 लाख की सहायता डिप्टी डायरेक्टर (कृषि) राजेन्द्र लाम्बा के अनुसार सरकार मशीनरी की कुल लागत पर 33 प्रतिशत सब्सिडी देगी। एक यूनिट पर अधिकतम 9.90 लाख रुपए तक अनुदान दिया जाएगा। यह सहायता 10 टन प्रतिदिन पेराई क्षमता तक के प्लांट पर लागू होगी, जबकि छोटे स्तर पर काम शुरू करने वाले किसानों और युवाओं को भी प्रो-राटा आधार पर सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को कच्चा माल बेचने की बजाय तैयार तेल बेचने के लिए प्रोत्साहित करना है ताकि उनकी आय में सीधा इजाफा हो सके। किसान समूह, युवा और निजी उद्यमी उठा सकेंगे लाभ यह योजना ग्रामीण उद्योग को बढ़ावा देने और रोजगार सृजन के लक्ष्य के साथ शुरू की गई है। इसके तहत किसान उत्पादक संगठन (FPO) और सहकारी समितियां अपना ब्रांड तैयार कर बाजार में उतार सकेंगी। शिक्षित बेरोजगार युवा कृषि आधारित स्टार्टअप शुरू कर आत्मनिर्भर बन पाएंगे, वहीं स्थानीय निजी उद्यमी भी ग्रामीण क्षेत्रों में उद्योग स्थापित कर योजना का लाभ ले सकेंगे। BIS मानक जरूरी, GST वेंडर से ही खरीदनी होगी मशीन सब्सिडी प्राप्त करने के लिए सरकार ने गुणवत्ता मानक अनिवार्य किए हैं। केवल BIS प्रमाणित मशीनों पर ही अनुदान मिलेगा और मशीन खरीद GST रजिस्टर्ड विक्रेता से ही करनी होगी। इसका उद्देश्य शुद्ध तेल उत्पादन और यूनिट की लंबी उम्र सुनिश्चित करना है, ताकि किसानों को टिकाऊ और भरोसेमंद उद्योग मिल सके। आवेदन के बाद सीधे खाते में आएगी सब्सिडी योजना को पारदर्शी बनाने के लिए DBT व्यवस्था लागू की गई है। इच्छुक आवेदक जिला परिषद के सीईओ कार्यालय या जिला तिलहन मिशन कार्यालय में आवेदन कर सकते हैं। भौतिक सत्यापन पूरा होने के बाद सब्सिडी की राशि सीधे बैंक खाते में जमा कर दी जाएगी। जमीन और शेड की व्यवस्था आवेदक को स्वयं करनी होगी तथा यूनिट कम से कम पांच वर्ष तक संचालित रखना अनिवार्य रहेगा। बम्पर सरसों उत्पादन, अब गांव में ही होगा प्रोसेसिंग कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार झुंझुनूं जिला सरसों उत्पादन का प्रमुख क्षेत्र है, जहां लगभग 1.30 लाख हेक्टेयर में बुवाई होती है। प्रति हेक्टेयर औसतन 1200 किलो उत्पादन के साथ सालाना करीब 1.56 लाख टन सरसों पैदा होती है। अभी तक प्रोसेसिंग यूनिट्स की कमी के कारण किसानों को कच्चा माल बाहर भेजना पड़ता था, लेकिन गांव में ही तेल बनने से किसानों को मूल्य संवर्धन का सीधा लाभ मिलेगा और ग्रामीण स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।


