फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के तहत दायर एक मामले में चंडीगढ़ की अदालत ने लिवप्रेस सस्पेंशन (न्यूट्रास्यूटिकल) के सैंपल को मानव उपभोग के लिए असुरक्षित पाए जाने के मामले में रिटेलर, डिस्ट्रीब्यूटर और होलसेलर को बरी कर दिया, जबकि निर्माता कंपनी को दोषी करार देते हुए 40 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। सीलबंद बोतलों का लिया सैंपल 28 मार्च 2023 को फूड सेफ्टी ऑफिसर ने सेक्टर-35डी स्थित गुरु नानक मेडिकोज प्राइवेट लिमिटेड की दुकान से “लिवप्रेस सस्पेंशन” की सीलबंद बोतलों का सैंपल लिया था। जांच के लिए भेजे गए सैंपल की रिपोर्ट में इसे कृत्रिम स्वीटनर पाए जाने के आधार पर मानव उपभोग के लिए असुरक्षित बताया गया। इसके बाद रिटेलर, होलसेलर और निर्माता कंपनी के खिलाफ फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत शिकायत दर्ज की गई थी। एक्सपायरी बेचने का आरोपी नहीं हुआ साबित अदालत ने अपने फैसले में कहा कि सैंपल सीलबंद पैक में था और रिटेलर या होलसेलर द्वारा उसे खराब हालत में रखने या एक्सपायरी के बाद बेचने का कोई आरोप साबित नहीं हुआ। ऐसे में कानून की धारा 27 के तहत उनकी जिम्मेदारी नहीं बनती। इस आधार पर आरोपी नंबर 1, 2 और 3 (रिटेलर व डिस्ट्रीब्यूटर) को बरी कर दिया गया। हालांकि, अदालत ने माना कि उत्पाद का निर्माण आरोपी नंबर 4 (निर्माता कंपनी) ने किया था और लैब रिपोर्ट में सैंपल को असुरक्षित पाया गया। इसलिए निर्माता कंपनी को धारा 59(1) के तहत दोषी ठहराया गया। कम आयु का दिया हवाला सजा के बिंदु पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने नरमी बरतने की अपील की। अदालत ने दोषी के उम्र और परिस्थितियों को देखते हुए नरमी दिखाते हुए 40 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। जुर्माना अदा करने के बाद मामले की फाइल रिकॉर्ड रूम में भेज दी गई।


