अजमेर दरगाह में शिव मंदिर होने के दावे को लेकर अजमेर सिविल कोर्ट में चल रही सुनवाई पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया हैं। ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के अनुयायी दरवेश समुदाय के सदस्यों द्वारा सुप्रीम कोर्ट में प्रार्थना पत्र दायर करके सुनवाई पर रोक लगाने की मांग की गई थी। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने पैलेस ऑफ वरशिप एक्ट-1991 की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करते दिसंबर-2024 में उपासना स्थलों के सर्वेक्षण (सर्वे) की मांग करने वाले किसी भी नए मुकदमे के पंजीकरण और लंबित मुकदमों में प्रभावी आदेश देने पर रोक लगा दी थी। आज दरवेश समुदाय के सदस्यों द्वारा इसी मामले में प्रार्थना पत्र दायर के कहा गया कि अजमेर सिविल कोर्ट सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश की अवहेलना करते हुए मामले को सुन रहा है और उसने पक्षकारों नोटिस भी जारी किए हैं। ऐसे में अजमेर कोर्ट में चल रही कार्यवाही पर रोक लगाई जाए। अभी तक कोई अंतरिम-अंतिम आदेश पारित नहीं हुआ
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारा आदेश सभी के लिए बाध्यकारी हैं, लेकिन अजमेर सिविल कोर्ट ने अभी तक कोई अंतरिम अथवा अंतिम आदेश जारी नहीं किया हैं। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता अजमेर मामले में पक्षकार नहीं हैं और उन्होंने मूल वादियों को भी पक्षकार नहीं बनाया हैं। ऐसे में उनके प्रार्थना पत्र पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया। दरगाह में शिव मंदिर होने का दावा
अजमेर सिविल कोर्ट में दरगाह में शिव मंदिर के दावे की पहली याचिका 27 नवंबर 2024 को हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता की ओर से लगाई थी। विष्णु गुप्ता ने दरगाह में संकट मोचन महादेव मंदिर होने का दावा किया था। न्यायालय ने याचिका को स्वीकार करते हुए दरगाह कमेटी समेत तीन पक्षकारों को नोटिस जारी किए थे। वहीं इसके बाद महाराणा प्रताप सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजवर्धन सिंह परमार की ओर से अजमेर दरगाह में शिव मंदिर होने का दावा किया गया। जिस पर भी कोर्ट ने सभी पक्षकारों को नोटिस जारी किए हैं। अब दोनों दावों पर अजमेर कोर्ट में 21 फरवरी को सुनवाई होगी।


