सीहोर में रुद्राक्ष रिसर्च सेंटर बनेगा वैश्विक केंद्र:पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा- भक्ति में ‘प्रदर्शन’ या ‘अहंकार’ जुड़ जाए, तो पुण्य फल शून्य

सीहोर के कुबेरेश्वर धाम में चल रही शिवमहापुराण कथा के पांचवें दिन रुद्राक्ष रिसर्च सेंटर की भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। इस महोत्सव में धर्म, विज्ञान और सामाजिक संस्कारों का संगम देखने को मिला। पंडित प्रदीप मिश्रा ने घोषणा की कि यह सेंटर सेवा और वैज्ञानिक शोध का एक वैश्विक केंद्र बनेगा। रुद्राक्ष रिसर्च सेंटर केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहेगा। यह केंद्र सीहोर की जीवनदायिनी ‘सीवन नदी’ के पारिस्थितिक पुनरुद्धार का कार्य भी करेगा। यहां रुद्राक्ष के औषधीय गुणों और जल प्रबंधन पर आधुनिक शोध किए जाएंगे। पंडित मिश्रा ने स्पष्ट किया कि सेंटर का लक्ष्य आध्यात्मिक ज्ञान को वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ जन-जन तक पहुंचाना है। भक्ति में ‘प्रदर्शन’ या ‘अहंकार’ जुड़ जाए, तो पुण्य शून्य पंडित प्रदीप मिश्रा ने अपने प्रवचन में कहा कि माता, पिता, गुरु, संत और सिपाही – ये पांच ऐसे व्यक्तित्व हैं, जिनका अनुभव कभी पुराना नहीं होता। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि आज के डिजिटल युग में अपनों के पास बैठना न भूलें। उन्होंने यह भी कहा कि यदि दान और भक्ति में ‘प्रदर्शन’ या ‘अहंकार’ जुड़ जाए, तो उसका पुण्य फल शून्य हो जाता है। उनके अनुसार, जीवन की तीन सबसे महत्वपूर्ण चीजें – मेहनत का फल, मुसीबत का टलना और आने वाला कल – केवल महादेव के हाथ में हैं। आज के विशिष्ट अतिथि मध्य प्रदेश भाजपा के प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह ने महोत्सव में शामिल होकर रुद्राक्ष महादेव की अर्चना की। उन्होंने कहा कि रुद्राक्ष महादेव का यह स्वरूप अलौकिक है और इनके दर्शन में एक साथ 12 ज्योतिर्लिंगों के पुण्य का अनुभव होता है। उन्होंने पूज्य गुरुदेव के माध्यम से हो रहे सेवा कार्यों की सराहना की। पंडित मिश्रा ने अत्यधिक भीड़ को देखते हुए बीमार व्यक्तियों को धाम न लाने की भावुक अपील की। कथा का अंतिम दिन 20 फरवरी को सुबह 8 बजे से 11 बजे तक रहेगा। इस कार्यक्रम में भोपाल की महापौर मालती राय सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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