पत्नी के चरित्र पर सवाल उठाते हुए तलाक के दावे को जोधपुर फैमिली कोर्ट ने खारिज कर दिया है। जोधपुर फैमिली कोर्ट के जस्टिस वरूण तलवार ने फैसला सुनाया है। इसमें बताया कि कामकाजी महिला पर चरित्रहीनता के आधार पर तलाक का मुकदमा दायर करने पर उसे साबित करना जरूरी है। 2015 से चल रहा था केस बता दें कि जलदाय विभाग के कर्मचारी ने तलाक के लिए मई 2015 में फैमिली कोर्ट में मुकदमा दायर किया था। इस मुकदमे में सुनवाई के बाद जज वरुण तलवार ने 7 दिसंबर को मुकदमा खारिज करते हुए यह निर्णय दिया कि सामान्यतः कामकाजी महिला के साथ विवाद होने पर उसका पति उस पर चरित्रहीन होने का आरोप लगा देता है। लेकिन, इस तरह के आरोप को ठोस साक्ष्य से साबित करना आवश्यक होता है। मात्र सामान्य आरोपों से पत्नी की चरित्रहीनता साबित नहीं होती। सबूत नहीं दे पाया पति पीड़ित महिला के वकील हैदर आगा ने बहस कर यह तर्क दिया कि पति ने ऐसी घटना की कोई तारीख महीना नहीं बताया है। न ही ऐसे सबूत दिए जिससे महिला के चरित्र पर सवाल उठाए जा सकें। हैदर आगा ने तर्क दिया पति ने उससे तलाक लेने के लिए झूठे आरोप लगाए हैं। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद न्यायाधीश ने यह माना कि यदि पति द्वारा अपनी पत्नी की चरित्र पर सवाल उठाते हुए तलाक की मांग की जाए तो सबूत पेश करें। जज ने दावा खारिज कर दिया।


