भास्कर न्यूज | बारगांव ग्राम बलौदी में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ सप्ताह में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। कथा के चौथे दिन बुधवार को कथावाचक पंडित जय श्रवण (सिमगा वाले) ने श्रद्धालुओं को जीवन मूल्यों का संदेश दिया। कहा कि मनुष्य का चरित्र उसके देखने और सुनने से बनता है। यदि व्यक्ति अपने नेत्र, श्रवण और वाणी पर नियंत्रण रखे तो वह कभी गलत मार्ग पर नहीं जाएगा। आज के समय में सबसे अधिक आवश्यकता है कि हम क्या देख रहे हैं और क्या सुन रहे हैं, इस पर सजग रहें। अच्छा देखना और सुनना ही अच्छे संस्कारों की नींव है। पंडित जय श्रवण ने कहा कि सत्संग और भगवान के नाम का स्मरण ही जीवन का सच्चा सहारा है। धन-दौलत और भौतिक सुख साथ नहीं जाते, लेकिन सत्कर्म और भक्ति ही मनुष्य के साथ चलते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे अपने जीवन में सकारात्मकता अपनाएं और बच्चों को भी धार्मिक संस्कार दें। कथा प्रसंग में उन्होंने भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि चार युगों सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलयुग, में भगवान ने समय-समय पर अवतार लेकर धर्म की रक्षा की। त्रेतायुग में भगवान विष्णु ने वामन, परशुराम और श्रीराम अवतार धारण किए। वामन अवतार की कथा सुनाते हुए उन्होंने बताया कि असुर राजा बलि ने अपने पराक्रम से देवलोक पर अधिकार कर लिया था। तब भगवान विष्णु ने बौने ब्राह्मण का रूप धारण कर राजा बलि से तीन पग भूमि मांगी। दो पग में उन्होंने धरती और आकाश नाप लिया तथा तीसरा पग बलि के सिर पर रखकर उन्हें मोक्ष प्रदान किया। उन्होंने कहा कि भगवान परशुराम, ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका के पुत्र थे। भगवान शिव के परम भक्त थे। शिव से प्राप्त परशु (फरसा) के कारण वे परशुराम कहलाए। इसके बाद भगवान श्रीराम ने अयोध्या में जन्म लेकर मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में आदर्श स्थापित किया और रावण सहित अनेक दैत्यों का अंत किया।


