भास्कर न्यूज| महासमुंद ग्राम बेमचा के गुलाब बाड़ा में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में भक्ति की ऐसी गंगा बही कि श्रोता भाव-विभोर हो उठे। बुधवार को कथा वाचक महाराज राजीव लोचन दास ने गजेंद्र मोक्ष और भक्त प्रहलाद के चरित्र का मर्मस्पर्शी वर्णन किया। संगीतमय भजनों की प्रस्तुति ने पांडाल में मौजूद भक्तों को अंत तक बांधे रखा। गजेंद्र मोक्ष का वृत्तांत सुनाते हुए महाराज ने जीवन का सार साझा किया। उन्होंने कहा कि जब परिस्थितियां हमारे अनुकूल न हों और सारे सहारे छूटने लगें, तब स्वयं को परमपिता परमात्मा को समर्पित कर देना चाहिए। शरणागत की पुकार सुनकर श्री हरि नारायण स्वयं दौड़े चले आते हैं और भक्त के सारे दुखों को हर लेते हैं। कथा के दौरान महाराज ने छत्तीसगढ़ की पावन धरा का यशगान करते हुए इसे देश का अद्वितीय राज्य बताया। उन्होंने कहा कि पूरे देश में छत्तीसगढ़ ही एकमात्र ऐसा राज्य है जिसे महतारी (मां) का दर्जा प्राप्त है। जिस घर में माता-पिता की सेवा और आज्ञा का पालन होता है, वहां साक्षात ईश्वर का वास होता है। ऐसे भक्तों को अलग से पूजा-पाठ की आवश्यकता नहीं पड़ती। छग महतारी की गोद में महानदी के रूप में साक्षात गंगा मैया प्रवाहित हो रही हैं। राजिम का त्रिवेणी संगम मां गंगा का ही स्वरूप है, इसलिए यहां के वासियों को कहीं दूर जाने की आवश्यकता नहीं है। इस मौके पर आरएसएस के छत्तीसगढ़ प्रांत सेवा प्रमुख तुलसी दास, जिला प्रचारक आदित्य, जीव जंतु कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष आलोक चंद्राकर, द्वारिका प्रसाद चंद्राकर, जानकी चंद्राकर, रमा चंद्राकर, संगीता राहुल चंद्राकर, निधि हर्ष चंद्राकर सहित बड़ी संख्या में अन्य मौजूद थे। पुण्य की अमृत गंगा: महाराज ने आयोजक समिति की सराहना करते हुए कहा कि बेमचा की पुण्यभूमि पर श्रीमद् भागवत रूपी अमृत गंगा बह रही है, जिसका लाभ न केवल ग्रामवासी बल्कि पूरे महासमुंद जिले के श्रद्धालु उठा रहे हैं। भजनों पर झूम उठे भक्त महाराज ने जब सुमधुर भजन छत्तीसगढ़ वो धाम हे, जहां रोम-रोम बसे श्री राम हे… गाया, तो श्रद्धालु झूमने पर मजबूर हो गए। उन्होंने माता कौशल्या के मायके (छत्तीसगढ़) और भगवान श्रीराम के प्रगाढ़ संबंधों का उल्लेख करते हुए बताया कि कैसे यह भूमि राममय है।


