भागवत कथा कल्पवृक्ष, भाव के अनुसार फल

बिलासपुर| श्री सिद्ध शक्तिपीठ शीतला माता मंदिर में आयोजित कलश यात्रा के साथ श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। कथा के प्रथम दिवस कथा व्यास आचार्य योगेश तिवारी महाराज ने श्रीमद्भागवत कथा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वेदों का सार युगों-युगों से मानव जाति तक पहुंचता रहा है और भागवत महापुराण को वेदों का सार कहा गया है। श्रीमद्भागवत की व्याख्या करते हुए उन्होंने बताया कि ‘श्रीमद्भागवत’ अर्थात जो ‘श्री’ से युक्त हो। यह ऐसी अमृतमयी कथा है जो देवताओं के लिए भी दुर्लभ मानी गई है। उन्होंने कहा कि राजा परीक्षित ने स्वर्ग के अमृत के स्थान पर कथामृत की ही मांग की थी। कथा के दौरान वृंदावन का अर्थ समझाते हुए आचार्य योगेश तिवारी महाराज ने कहा कि वृंदावन मनुष्य का मन है। कभी-कभी मन में भक्ति का भाव जागृत होता है, लेकिन वह स्थायी नहीं रह पाता।

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