पश्चिमी विक्षोभ के असर से जिले में लगातार दूसरे दिन बुधवार को हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश हुई। कई इलाकों में ओळे भी गिरे। उत्तरी हवा के प्रभाव से एक ही दिन में अधिकतम तापमान में 10.1 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। मौसम विभाग ने गुरुवार को भी न्यूनतम तापमान में भी गिरावट होने की संभावना जताई है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि दो दिन हुई मध्यम दर्जे की बारिश से बारानी चने की बढ़वार होगी, वहीं गेहूं की पैदावार बढ़ेगी। जिले में मंगलवार रात के बाद बुधवार सुबह, दोपहर एवं शाम को छितराई हुई बारिश हुई। बुधवार को चूरू व साहवा में ओळे गिरे। मंगलवार रात साहवा के वार्ड 16 में शौकीन खान मिस्त्री की घर पर आकाशीय बिजली गिरने से टंकी की दीवार टूट गई। मकान में दरारें आई। दो दिन में चूरू में 9.1 एमएम बारिश हुई। सरदारशहर में 3, भानीपुरा में 12, राजगढ़ में 2 व राजलदेसर में 3 एमएम बारिश हुई। सुजानगढ़, रतनगढ़ व तारानगर में बूंदाबांदी हुई। सादुलपुर में बुधवार को दिनभर रूक-रूककर बूंदाबांदी होती रही। बुधवार को अधिकतम 21.3 एवं न्यूनतम तापमान 15.4 डिग्री रहा, जबकि इससे पहले मंगलवार को अधिकतम 31.4 एवं न्यूनतम तापमान 15.6 डिग्री था। जयपुर मौसम केंद्र के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ बुधवार रात तक प्रदेश से निकल जाएगा। अब बारिश की संभावना नहीं है। 1-2दिन बादलवाई रह सकती है। न्यूनतम तापमान में गिरावट हो सकती है। पांच साल में दूसरी बार जिले में पश्चिमी विक्षोभ से 18 फरवरी को बारिश हुई। इससे पहले 2022 में पश्चिमी विक्षोभ से जिले में बादलवाई रही, जबकि सादुलपुर में हल्की बारिश हुई। इतना ही नहीं 18 फरवरी पिछले 5 साल में इस बार सबसे सर्द रहा तथा अधिकतम तापमान सबसे कम 21.3 डिग्री रहा। 2023 में 18 फरवरी को दिन का तापमान 32.5 डिग्री रहा था। कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक कैलाश चौधरी का कहना है कि रबी की बुवाई में सबसे ज्यादा चने की 3 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई। बारानी फसलों में चने, सरसो, गेहूं को फायदा होगा, क्योंकि ये बारिश पर आधारित है। सरसो हालांकि पकाव की ओर है। गेहूं, चना व जौ की बढ़वार होगी। उन्होंने बताया कि दो दिन में जिले के चूरू, तारानगर, सादुलपुर, सरदारशहर व रतनगढ़ में हल्की बारिश हुई। ओळावृष्टि कुछ देर के लिए हुई, जिससे ज्यादा नुकसान की संभावना नहीं है। सहायक निदेशक कुलदीप शर्मा ने बताया कि जिले में 3 लाख हैक्टेयर में चना, 2 लाख हैक्टेयर में सरसो, 50 हजार हैक्टेयर में गेहूं की बुवाई की गई है। सुजानगढ़ इलाके में ओलावृष्टि या तेज बारिश होती तो ईसबगोल की फसल को नुकसान होता है। साल अधिकतम न्यूनतम 2026 21.3 15.4 2025 28.2 16.6 2024 31.3 10.5 2023 32.5 11.4 2022 28.1 11.5 साहवा में ओळे गिरे।


