भास्कर संवाददाता | चूरू सीजन का सबसे बड़ा सावा गुरुवार को है, क्योंकि 19 फरवरी को फाल्गुन माह की शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि पर फुलेरा दूज मनाई जाएगी। इसे अबूझ और स्वयंसिद्ध मुहूर्त माना गया है। यानी इस दिन विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों के लिए मुहूर्त की आवश्यकता नहीं होती। इसी कारण इस दिन जिले में 250 शादियों होने की संभावना है। इसमें 45 तो अकेले चूरू शहर में हो रही हैं। रतनगढ़-सुजानगढ़ में 35 से 40, सरदारशहर, तारानगर व सादुलपुर में 25 से 30 शादियां हो रही हैं। अन्य सालासर, बीदासर, छापर, रतननगर व राजलदेसर के अलावा ग्रामीण एरिया में हो रही हैं। पुजारी पंकज चोटिया ने बताया कि 19 फरवरी को इस सीजन का सबसे बड़ा सावा है। इसकी खास वजह 24 फरवरी से होलाष्टक लगना है, जो कि 3 मार्च तक प्रभावी रहेंगे। इसके बाद अप्रैल तक मुहूर्त नहीं है। इस दौरान सूर्य देव मीन राशि में प्रवेश कर जाएंगे। ऐसे में शादी-विवाह के आयोजन नहीं होंेगे। इसलिए 19 फरवरी को अबूझ सावे पर वर्कलोड है। जिले में 200 से ज्यादा मैरिज गार्डन, होटल और धर्मशालाएं हैं, जो अधिकांश बुक हैं। यह साल का दूसरा अबूझ मुहूर्त है। इससे पहले 23 जनवरी को बसंत पंचमी स्वयंसिद्ध मुहूर्त था। द्वितीया तिथि 18 फरवरी को शाम 4:57 बजे शुरू हो गई। इसका समापन 19 फरवरी को अपराह्न बाद 3:58 बजे होगा। उदियात तिथि की मान्यता से 19 फरवरी को फुलेरा दूज मानी जाएगी। हालात ये है कि अभी पंडित, हलवाई, टैंट व्यवसायी, बैंडबाजा-डीजे सहित अन्य को फुर्सत नहीं है।


