छात्राओं को सुरक्षा पर कोई ध्यान नहीं दे रहा

भास्कर न्यूज | कवर्धा सरकार बेटियों को सुरक्षित माहौल में पढ़ाई का भरोसा देती है। लेकिन शहर के पीजी कॉलेज परिसर के पीछे संचालित कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय छात्रावास (टाइप- 4) से जो तस्वीर सामने आई है, वह इस भरोसे को कटघरे में खड़ा करती है। यहां रह रहीं छात्राओं का आरोप है कि भोजन में सड़ा व कीड़े लगी सब्जियां दी जा रही है। यही नहीं, रात में खिड़कियों से युवकों के ताक-झांक से छात्राएं सहमी हुई हैं। हॉस्टल की 50 छात्राओं में से 31 ने हस्ताक्षर कर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। आरोप सीधे वार्डन की कार्यप्रणाली पर हैं। छात्राओं ने कुछ वीडियो क्लिप भी बनाई है, जहां हॉस्टल के अंदर भोजन और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। छात्राओं ने दावा किया कि छात्रावास में परोसी जाने वाली सब्जियां कई बार सड़ी-गली होती हैं। अस्वच्छ सामग्री से भोजन बनवाया जाता है। मामले में वार्डन राजनंदनी खाखा को फोन लगाया, लेकिन रिसीव नहीं की। बजट का हवाला देकर टाल देती हैं वार्डन हॉस्टल में रह रहीं छात्राओं ने कहा कि खाने में कीड़े- मकोड़े मिलने की शिकायत वार्डन से की गई। आरोप है कि जब बेहतर भोजन या अतिरिक्त सामग्री की मांग की गई, तो वार्डन ने कथित तौर पर बजट का हवाला देकर टाल दिया गया। बालिका छात्रावास में इस तरह की शिकायत प्रशासनिक जिम्मेदारी पर बड़ा प्रश्नचिह्न है। पूर्व में छात्राओं ने शिकायत जिला शिक्षा अधिकारी से शिकायत की थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। कलेक्टर से लिखित शिकायत के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आया। जिला शिक्षा अधिकारी एफआर वर्मा का कहना है कि खराब सब्जियों का वीडियो मिला है। जांच के लिए दो सदस्यीय टीम गठित की गई है। रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की बात कही गई है। कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय छात्रावास का उद्देश्य बेटियों को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण देना है। लेकिन जब 31 छात्राएं एक साथ आगे आकर शिकायत दर्ज कराएं, तो यह सामान्य असंतोष नहीं, बल्कि गहरे असंतुलन का संकेत हैं। अब प्रशासन की कार्रवाई पर नजर है। क्योंकि पूर्व में बीईओ ऑफिस कवर्धा में 218 करोड़ के कथित घोटाले की जांच अब तक पेंडिंग पड़ी है। बीमार पड़ो तो इंतजार करो ज्ञापन में यह भी आरोप है कि बीमार छात्राओं को समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिलती। आपात स्थिति में भी त्वरित व्यवस्था का अभाव बताया गया है। यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि छात्राओं के स्वास्थ्य के साथ जोखिम है। छात्राओं ने वार्डन पर कठोर और भेदभावपूर्ण व्यवहार का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि समस्याएं बताने पर समाधान नहीं, बल्कि डांट- फटकार का सामना करना पड़ता है।

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