भास्कर न्यूज | नूरपुरबेदी बरारी के प्राचीन शिव मंदिर में आयोजित शिव महापुराण कथा के दौरान कथा व्यास आचार्य रोहित कृष्ण शास्त्री ने कहा कि मानव जीवन बहुत कीमती वरदान है और इसका सही लाभ भक्ति, विश्वास और समर्पण से ही प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य अपने अहंकार, लालच और क्रोध को त्याग कर प्रभु के चरणों में शीश नवाता है, तब उसके जीवन में आध्यात्मिक प्रकाश उत्पन्न होता है और सच्ची शांति का अनुभव होता है। आचार्य ने भगवान शिव की महिमा का विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि भगवान शिव दया, करुणा और क्षमा के स्वरूप हैं। वे अपने भक्तों की एक सच्ची प्रार्थना से ही प्रसन्न हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि अगर मनुष्य निष्काम भाव से भक्ति करे और दूसरों की सेवा को अपना धर्म बनाए, तो उसके जीवन के संकट स्वयं दूर होने लगते हैं। कथा में बताया गया कि सत्य का मार्ग कभी आसान नहीं होता, लेकिन जो मनुष्य धैर्य और विश्वास के साथ इस मार्ग पर अडिग रहता है, उसे अंततः सफलता और प्रभु की कृपा अवश्य प्राप्त होती है। उन्होंने आज के भौतिकवादी युग का उल्लेख करते हुए कहा कि मनुष्य धन-दौलत और मान-सम्मान की दौड़ में अपनी आध्यात्मिकता को भूलता जा रहा है। वास्तविक खुशी न तो पैसे में है और न ही पद में, बल्कि यह आंतरिक संतोष और प्रभु से जुड़ाव में है। नाम सिमरण, सत्संग और सच्ची जीवन शैली ही मनुष्य को ऊंचा बनाती है। अंत में आचार्य जी ने संगत को प्रेरित करते हुए कहा कि प्रतिदिन कुछ समय प्रभु की भक्ति के लिए निर्धारित करें, माता-पिता और बुजुर्गों का सम्मान करें। शिव महापुराण हमें यही शिक्षा देती है कि भक्ति ही मुक्ति का मार्ग है और नम्रता, सच्चाई के साथ रहने वाले का जीवन धन्य हो जाता है। बरारी के शिव मंदिर में प्रवचन करते आचार्य रोहित कृष्ण शास्त्री। (दाएं) पंडाल में उपस्थित संगत।


