चिन्मय अमृत आश्रम में 329वीं चिन्मय स्वरांजलि में गूंजे शिव भजन, भजन संध्या में शिवमय हुआ पंडाल…

भास्कर न्यूज | अमृतसर महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर चिन्मय मिशन ने 329वीं चिन्मय स्वरांजलि भजन संध्या का आयोजन चिन्मय अमृत आश्रम में किया। कार्यक्रम का आयोजन अनिल सिंघल एवं परिवार द्वारा श्रद्धा भाव से किया गया, जिसमें शहर भर से श्रद्धालुओं ने भाग लिया। दीप प्रज्जवलन के साथ शुरू हुए इस आध्यात्मिक समारोह में गणपति वंदना की गई। भजन संध्या में विभिन्न भक्तों ने शिव महिमा का गुणगान किया। सिमरनजीत सिंह ने आदिशक्ति शंकर… भजन से श्रद्धा अर्पित की, जबकि बाली ने शिव भोला भण्डारी… के माध्यम से भोलेनाथ की करुणा का वर्णन किया। इंदू बाला ने आदिदेव महादेव… से दयालुता का संदेश दिया। दीपक द्वारा प्रस्तुत शिव समा रहे मुझमें… भजन ने अद्वैत भाव की अनुभूति कराई। अविनाश ने सामूहिक ‘शिव-नाम-संकीर्तन’ से पूरे पंडाल को शिवमय कर दिया। डम डम शिव का डमरू बाजे रे… भजन पर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। संगीतकार के रूप में अजय कुमार, विक्रम और विक्रान्त ने अपनी सधी हुई प्रस्तुति से कार्यक्रम को ऊंचाई दी। कार्यक्रम में मिशन के अध्यक्ष अविनाश महेंद्रू ने शिव के दार्शनिक स्वरूप की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि शिव केवल एक देवता नहीं, बल्कि ‘सच्चिदानंद’ तत्व हैं, जो हर मनुष्य के भीतर स्थित हैं। उन्होंने बताया कि शिव के मस्तक का चंद्रमा शांत मस्तिष्क का प्रतीक है, जटाओं से बहती गंगा ज्ञान का प्रवाह दर्शाती है और गले का सर्प निर्भयता का संदेश देता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उपवास का अर्थ केवल अन्न त्याग नहीं, बल्कि इंद्रियों और वाणी पर संयम रखना है। यही सच्ची शिव आराधना है। इस अवसर पर सामाजिक सरोकारों की भी घोषणा की गई। सीमावर्ती बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में एक स्कूल के पुनर्निर्माण हेतु सहयोग का ऐलान किया गया। साथ ही वर्ष 2026 में चिन्मय मिशन के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में 3 मई को 1008 कुंडीय हनुमान चालीसा समष्टि महायज्ञ आयोजित करने की जानकारी दी गई। इस महायज्ञ का नारा चैंट अमृतसर, शांत अमृतसर रखा गया है।

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