रीको औद्योगिक क्षेत्र खारा में पीओपी की फैक्ट्रियों से फैल रहे वायु प्रदूषण के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण(एनजीटी) ने संज्ञान ले लिया है। संयुक्त कमेटी बनाकर जांच के निर्देश देते हुए चार सप्ताह में जवाब मांगा है तथा छह सप्ताह में फैक्चुअल रिपोर्ट पेश करने के नोटिस जिला कलेक्टर और प्रदूषण नियंत्रण मंडल को जारी किए गए हैं। इस मामले को दैनिक भास्कर ने प्रमुखता से उठाया था। खारा गांव में वायु प्रदूषण को लेकर रामसिंह ने ज्ञापन के साथ दैनिक भास्कर की कटिंग एनजीटी को मेल की थी। इस पर गंभीर होते हुए एनजीटी ने राज्य राजस्थान, जिला मजिस्ट्रेट बीकानेर, राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जिला शिक्षा अधिकारी तथा पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव को प्रतिवादी बनाया है। उन्हें नोटिस जारी करते हुए छह सप्ताह में कार्यवाही करते हुए फैक्चुअल रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 15 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है। न्यायमूर्ति शियो कुमार सिंह (न्यायिक सदस्य) और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी ने सुनवाई की। बच्चों को स्कूल न भेजने के विरोध के बाद प्रशासन को नोटिस : एनजीटी की केंद्रीय क्षेत्रीय पीठ, भोपाल ने ग्राम खारा (जिला बीकानेर) में बढ़ते वायु प्रदूषण के मामले में स्वतः संज्ञान लिया है। यह मामला गांव के निवासी राम सिंह खारा द्वारा भेजे गए ई-मेल के आधार पर दर्ज किया गया, जिसमें वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। प्रदूषण से परेशान होकर ग्रामीणों ने बच्चों को स्कूल नहीं भेजने का निर्णय लिया था। खारा गांव रीको औद्योगिक क्षेत्र से सटा हुआ है। पास ही मिनरल जोन है, जहां पीओपी की 40 से अधिक फैक्ट्रियां हैं। सर्दियों में हवा गांव की तरह होने पर पीओपी की धुआं गर्द सहित गांव पर छा जाता है। पिछले साल नवंबर में इस क्षेत्र का एक्यूआई 900 तक पहुंच गया था। वायु प्रदूषण के कारण बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे थे। प्रदूषण नियंत्रण मंडल का दल जयपुर से जांच के लिए आया। उसके बाद प्रदूषण नियंत्रित करने के लिए फैक्ट्रियों पर उपकरण लगाए गए थे, लेकिन उसके बाद भी ठोस समाधान नहीं हो पाया है। गांव के ही गजेसिंह का कहना है कि कुछ फैक्ट्रियां नियमों का उल्लंघन कर रही हैं, जिसकी वजह से काला धुआं और गर्द आए दिन गांव पर छा जाती है। संयुक्त कमेटी करेगी जांच एनजीटी ने खारा में वायु प्रदूषण की जांच के लिए संयुक्त कमेटी गठित करने के निर्देश दिए हैं। इस कमेटी में जिला कलेक्टर के प्रतिनिधि और प्रदूषण नियंत्रण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी शामिल होंगे। जांच के बाद फैक्चुअल रिपोर्ट छह सप्ताह में एनजीटी के समक्ष पेश करनी होगी। वहीं दूसरी तरफ करणी औद्योगिक क्षेत्र में भी पर्यावरण प्रदूषण को लेकर एनजीटी ने रिपोर्ट मांग रखी है। इस संबंध में रीको की अपील भी सुप्रीम कोर्ट में खारिज हो गई थी। सीईटीपी लगाने को लेकर प्रशासन के हाथ-पैर फूले हुए हैं।


