पंजाब में अब स्कूलों के नाम से जातिगत पहचान हटेगी। पंजाब विद्यालय शिक्षा निदेशालय (माध्यमिक) ने प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (डीईओ) को कड़ा निर्देश जारी कर ऐसे स्कूलों की पूरी सूची मांगी है। डीईओ नाम में आपत्तिजनक जातिगत शब्द वाले स्कूलों की रिपोर्ट दो दिन में सौंपेगे। पत्र में कहा है कि सरकार के संज्ञान में आया है कि कुछ स्कूलों के नाम जातिगत आधार पर रखे गए हैं, जो संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप नहीं हैं। इस तरह के शब्द पूरी तरह अनुचित हैं और सामाजिक समानता के मूल्यों के खिलाफ हैं। सरकारी पत्र में उल्लेख किया गया है कि कुछ स्कूलों के नाम आपत्तिजनक शब्दों में रखे गए हैं, जो कि जातिगत के नाम पर रखे गए हैं। जैसे हरिजन बस्ती, बाजीगर बस्ती आदि शामिल हैं। अब ये नाम हटेंगे। डीईओ को निर्देश दिए गए हैं कि संलग्न सूची के अतिरिक्त अपने-अपने जिलों के सभी ऐसे स्कूलों की पहचान कर दो दिनों के भीतर ईमेल आईडी dpiseedsa@punjabeducation.gov.in पर पूरी जानकारी भेजें। इन जिलों में बदलेंगे स्कूलों के नाम शिक्षा विभाग के सूत्रों के मुताबिक, अमृतसर, तरनतारन, जालंधर, कपूरथला और सीमावर्ती ग्रामीण जिलों में बस्ती आधारित नाम वाले स्कूलों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक है। कई स्कूलों के नाम दशकों पुराने हैं, जो उस समय स्थानीय बस्तियों के नाम पर रखे गए थे। अब इन सभी नामों की समीक्षा होगी। जरूरत पड़ने पर नाम परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। ऐसे नाम बच्चों के मन में भेदभाव की भावना पैदा कर सकते हैं केंद्र सरकार भी पहले आपत्तिजनक जातिगत शब्द के प्रयोग को लेकर आपत्ति जता चुकी है। इसे आधिकारिक दस्तावेजों से हटाने के निर्देश दे चुकी है। राज्य सरकार का यह फैसला सामाजिक न्याय की नीति के तहत देखा जा रहा है। स्कूल केवल पढ़ाई की जगह नहीं, बल्कि सामाजिक सोच का निर्माण केंद्र हैं। जातिगत शब्द बच्चों के मन में भेदभाव की भावना पैदा कर सकते हैं। नाम बदलना समय की मांग है।- डॉ. जतिंदर अरोड़ा, शिक्षा विशेषज्ञ


