चंडीगढ़ में किडनैपिंग के लिए बनाया व्हाट्सएप ग्रुप ‘धवन:3400 पेज की चार्जशीट में बड़ा खुलासा, डॉ. मोहित धवन केस में पुलिस की साजिश बेनकाब

चंडीगढ़ में शहर के नामी डेंटिस्ट डॉ. मोहित धवन के कथित अपहरण मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जांच एजेंसी ने करीब 3400 पेज की चार्जशीट जिला अदालत में दाखिल की है, जिसमें इंस्पेक्टर समेत कई पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाया गया है। चार्जशीट में खुलासा हुआ है कि डॉक्टर का पीछा करने और उन्हें पकड़ने के लिए पुलिसकर्मियों ने पहले से एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया था, जिसका नाम “धवन” रखा गया था। इसी ग्रुप में उनकी लोकेशन, कपड़ों की जानकारी और मूवमेंट शेयर की जा रही थी। जिला अदालत के बाहर से किया गया था अगवा जांच के मुताबिक, 6 जनवरी 2022 को डॉ. मोहित धवन को सेक्टर-43 स्थित जिला अदालत के बाहर से पकड़ा गया। बताया गया है कि वह एक मामले में अदालत में पेश होने पहुंचे थे। चार्जशीट में कहा गया है कि पुलिसकर्मी नहीं चाहते थे कि डॉक्टर अदालत में जज के सामने पेश हों। इसलिए उन्हें अदालत के गेट से ही निजी गाड़ी में बैठाकर शहर में अलग-अलग जगह ले जाया गया और कई घंटे तक गैरकानूनी तरीके से रखा गया। व्हाट्सएप ग्रुप में ऐसे रची गई साजिश जांच में सामने आया है कि वारदात से कुछ घंटे पहले ही व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया था, जिसमें करीब 11 पुलिसकर्मी जुड़े थे। ग्रुप में डॉक्टर की पहचान, कपड़ों का रंग, लोकेशन और अदालत पहुंचने का समय साझा किया जा रहा था। जैसे ही एक पुलिसकर्मी ने उन्हें देखा, तुरंत ग्रुप में उनकी तस्वीर और जानकारी डाल दी गई। इसके बाद सभी पुलिसकर्मी तय योजना के अनुसार मौके पर पहुंचे। चार्जशीट में इंस्पेक्टर हरिंदर सेखों के अलावा एएसआई, हेड कांस्टेबल और कई कांस्टेबलों के नाम शामिल हैं। जांच एजेंसी ने सभी के खिलाफ साजिश, गैरकानूनी हिरासत और अपहरण जैसी धाराओं में मुकदमा चलाने की सिफारिश की है। सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद मामला ट्रांसफर डॉ. मोहित धवन ने एक अन्य आपराधिक मामले में अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने उन्हें ट्रायल कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया था। बताया गया है कि जिस दिन उन्हें अदालत में पेश होना था, उसी दिन यह घटना हुई। बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। अदालत के हस्तक्षेप के बाद जांच चंडीगढ़ पुलिस से लेकर केंद्रीय एजेंसी को सौंपी गई। लंबी जांच के बाद अब अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी गई है। अदालत में पेश होने से क्यों रोका गया जांच एजेंसी का कहना है कि प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि डॉक्टर को जानबूझकर अदालत में पेश होने से रोका गया। अब अदालत में इस मामले की सुनवाई होगी और आरोपी पुलिसकर्मियों पर कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। यह मामला पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। अदालत में सुनवाई के दौरान और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है।

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