कोटा शहर के आरके पुरम थाना इलाके से जुड़े मामले में पुलिस मुख्यालय ने आरोपी कॉन्स्टेबल मनीष यादव को नौकरी से हटा दिया। युवक को झूठे केस में फंसाने की धमकी, लूटपाट और अपहरण जैसे गंभीर आरोपों की जांच के बाद यह फैसला लिया गया। सिटी एसपी तेजस्विनी गौतम ने बताया कि विभागीय जांच में कॉन्स्टेबल का आचरण गैर-जिम्मेदाराना और सेवा नियमों के विपरीत पाया गया। जांच में सामने आया कि कॉन्स्टेबल के खिलाफ कई गंभीर शिकायतें पेंडिंग थीं। इनमें परिवादों को लंबे समय तक बेवजह लंबित रखना, समय पर उपस्थिति दर्ज नहीं कराना, ड्यूटी के दौरान लोकेशन ऑफ रखना और बिना सूचना छुट्टी पर चले जाना शामिल है। पुलिस प्रशासन ने इन सभी पहलुओं को सेवा अनुशासन का उल्लंघन मानते हुए बर्खास्तगी के आदेश जारी किए। यह था पूरा मामला सूत्रों के अनुसार, यह पूरी घटना नशे की एक बड़ी खेप से जुड़ी हुई है। बर्खास्त कॉन्स्टेबल ने पैसे के लालच में अपने दोस्तों को साथ लिया और निजी स्तर पर कार्रवाई की। इस पूरी कार्रवाई में अपने दोस्त की कार का उपयोग भी किया। पीड़ित ने एसपी ऑफिस में अपहरण और लूट की शिकायत दर्ज कराई, जिसमें बताया गया कि उससे एक बैग छीन लिया गया। बैग में गहने, नकदी और एक पैकेट था। दूसरे पैकेट में क्या था, इसकी जानकारी पीड़ित को खुद नहीं थी, लेकिन इसी वजह से उसे भी गिरफ्तार कर लिया गया। फिलहाल, बर्खास्त कॉन्स्टेबलऔर उसके सभी साथी सेंट्रल जेल जेल में बंद हैं।


