कांग्रेसियों ने मनरेगा कानून बदलाव पर बैरिकेडिंग तोड़ी:महासमुंद में उमेश पटेल बोले- सरकार 11 सालों से मनरेगा के खिलाफ काम कर रही

महासमुंद में जिला कांग्रेस कमेटी ने बुधवार को ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ के तहत कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सुरक्षा के लिए लगाए गए चार बैरिकेड में से पहला बैरिकेड तोड़ दिया। इस दौरान धक्का-मुक्की में दो पुलिसकर्मी नीचे गिर गए। स्थिति बिगड़ने से पहले युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष अमन चंद्राकर ने सामने खड़े होकर दोनों पुलिसकर्मियों को भीड़ में कुचले जाने से बचाया। कार्यक्रम की शुरुआत राजीव भवन में आमसभा के रूप में हुई। विधायक उमेश पटेल ने कहा कि यूपीए शासनकाल में मनमोहन सिंह सरकार ने गरीब मजदूरों के लिए मनरेगा कानून बनाया था, जिसमें रोजगार की गारंटी दी गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी सरकार पिछले 11 सालों से मनरेगा के खिलाफ काम कर रही है। कांग्रेस का आरोप- रोजगार की गारंटी खत्म की गई उमेश पटेल ने कहा कि पहले मनरेगा में रोजगार की गारंटी थी, लेकिन संशोधित कानून में इसे खत्म कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि पहले मनरेगा की राशि पूरी तरह केंद्र सरकार देती थी, लेकिन अब नए नियम के अनुसार 60 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार देगी। कांग्रेस नेताओं ने जताई मनरेगा बंद होने की आशंका कांग्रेस नेताओं ने कहा कि कई राज्य सरकारें यदि 40 प्रतिशत हिस्सा नहीं दे पाईं तो मनरेगा पूरी तरह बंद हो सकता है। इससे गरीबों को मिलने वाला रोजगार खत्म हो जाएगा और छत्तीसगढ़ में पलायन बढ़ सकता है। स्मार्ट मीटर और बिजली बिल बढ़ोतरी का मुद्दा भी उठा सभा में नेताओं ने स्मार्ट मीटर लगाने और लगातार बिजली बिल बढ़ने को लेकर सरकार पर हमला बोला। रैली निकालकर कलेक्टोरेट पहुंचे कार्यकर्ता सभा के बाद कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने रैली निकाली और कलेक्टोरेट पहुंचकर घेराव किया। इस दौरान पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच जमकर नारेबाजी और धक्का-मुक्की हुई। पहला बैरिकेड टूटा, बड़ा हादसा टला कलेक्ट्रेट के बाहर पुलिस ने चार लेयर में सुरक्षा व्यवस्था लगाई थी। प्रदर्शनकारियों ने पहला बैरिकेड तोड़ दिया। बैरिकेडिंग टूटने और धक्का-मुक्की के दौरान दो पुलिसकर्मी नीचे गिर गए। अमन चंद्राकर ने बचाई पुलिसकर्मियों की जान धक्का-मुक्की के दौरान युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष अमन चंद्राकर नीचे गिरे पुलिसकर्मियों के सामने खड़े हो गए। उन्होंने भीड़ को रोककर दोनों जवानों को कुचले जाने से बचाया। इसके बाद पुलिसकर्मियों को उठाकर सुरक्षित किया गया। दूसरा घेरा तोड़ने में नाकाम रहे प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं ने दूसरे सुरक्षा घेरे को तोड़ने की कोशिश की, लेकिन पुलिस बल के कारण आगे नहीं बढ़ सके। एसडीएम को सौंपा ज्ञापन स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने एक प्रतिनिधिमंडल को बुलाया। प्रतिनिधिमंडल में उमेश पटेल, विजय जांगिड़, द्वारिकाधीश यादव, चातुरी नंद समेत अन्य पदाधिकारी शामिल रहे। प्रतिनिधिमंडल ने एसडीएम अक्षा गुप्ता को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि पुराने मनरेगा कानून को बहाल किया जाए और संशोधित कानून को निरस्त किया जाए। चार लेयर में रही सुरक्षा व्यवस्था भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने कलेक्टोरेट परिसर में भारी सुरक्षा व्यवस्था की थी। तैनाती में शामिल रहे— 2 अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक 4 डीएसपी 14 टीआई 230 जवान

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