राजस्थान की ट्रेनों में शराब बेची जा रही है। बस लंच-डिनर की तरह ऑर्डर दीजिए, मनचाहे ब्रांड की शराब सीट पर पहुंच जाएगी। ये खौफनाक सच है एक्सप्रेस ट्रेनों के AC कोच का। मामूली मुनाफे के लिए ट्रेन में तैनात स्टाफ ही महिलाओं-बच्चियों की सुरक्षा को खतरे में डाल रहे हैं। भास्कर रिपोर्टर ने चार अलग-अलग ट्रेनों में यात्रा कर पड़ताल की। शराब बेचने वालों को कैमरे पर बेनकाब किया। तकिए-चादर का जिम्मा संभालने वाले स्टाफ से लेकर चिप्स-बिस्किट बेचने वाले इस काम में शामिल मिले। एक स्टाफ ऑर्डर देने के कुछ समय बाद ही शराब लेकर पहुंच गया। यहां तक कि अगली यात्रा में एडवांस बुकिंग के लिए मोबाइल नंबर तक दे दिए। पढ़िए- इन्वेस्टिगेटिव स्टोरी…. राजस्थान में रात 8 बजे के बाद बैन अपनी पड़ताल की शुरुआत हमने मरुधर एक्सप्रेस (जोधपुर टू वाराणसी) ट्रेन से की। जोधपुर से जयपुर जाने के लिए थर्ड AC कोच में टिकट बुक किए। जोधपुर रेलवे स्टेशन से रात 8.30 बजे ट्रेन रवाना हुई। कोच लगभग भरा हुआ था। उसमें बच्चे-बच्चियां और महिलाएं भी थीं। इसी दौरान हमें हैरान कर देने वाली जानकारी मिली। चलती ट्रेन में शराब की VIP डिलीवरी होती है। इस काम को AC कोच के अटेंडेंट ही अंजाम देते हैं। ट्रेन में शराब की डिलीवरी को एक्सपोज करने का हमारे पास मौका था। सफर के दौरान ही हमने अपनी पड़ताल की शुरू कर दी। ट्रेन के रवाना होने के बाद कोच का अटेंडेंट अनुराग मिला। हमने उससे बातचीत शुरू की। दोगुनी कीमत पर अटेंडेंट मनचाहा ब्रांड उपलब्ध कराने को तैयार हो गए। बातचीत के अंश… रिपोर्टर : कब तक दोगे? ट्रेन स्टाफ : मकराना के पास मिलेगी। वहां मेरा साथी लेकर आएगा। रिपोर्टर : थोड़ा जल्दी करवा दो न। ट्रेन स्टाफ : यह गाड़ी चलती है दिल्ली से, हम तो चंडीगढ़ स्टाफ हैं। अभी एक महीने के लिए इस ट्रेन पर लगे हैं। ट्रेन स्टाफ अनुराग ने हमारे सामने ही एक युवक को फोन कर लाउडस्पीकर पर बात की। ट्रेन स्टाफ : ताऊ कौन से स्टेशन पर लेकर (शराब बोतल) आएगा। फोन पर बात करने वाला व्यक्ति : मकराना पर मिल जाऊंगा। ट्रेन स्टाफ (फोन पर) : कस्टमर सुन रहे हैं, एक बार रेट बता दो कितने पैसे लोगे…इनको डायरेक्ट बता दो क्लियर हो जाएगा। अटेंडेंट का सहयोगी (फोन पर) : 450 से 500 रुपए लगेंगे। एक ब्रांड (XXXXX) का क्वार्टर (पव्वा) 180 एमएल लेकर आऊंगा। फोन काटने के बाद अटेंडेंट ने बातों ही बातों में कई चौंकाने वाले खुलासे भी किए…. ऊपर की कमाई तो बिना टिकट वाले पैसेंजर से होती है रिपोर्टर : आपको ट्रेन में कितनी सैलरी मिलती है। ट्रेन स्टाफ : सैलरी तो कम ही है, लेकिन काम कुछ नहीं करना होता है। पैसेंजर के आने से पहले सिर्फ बेडशीट रखनी होती है। बाकी तो AC में आराम करते हैं। रिपोर्टर : अगर ट्रेन में कोई बेडशीट चुरा लेते हैं तो किसके पैसे कटते हैं। ट्रेन स्टाफ : बेडशीट गायब होने पर हमारे पर 120 रुपए फाइन लगता है। रिपोर्टर : शराब की डिमांड भी आती होगी? ट्रेन स्टाफ : हां, दिल्ली जाने वाली लड़कियां सबसे ज्यादा शराब की डिमांड करती हैं। रिपोर्टर : तो आपकी ऊपर की कमाई क्या होती है? ट्रेन स्टाफ : बिना टिकट के पैसेंजर आते हैं। उन्हें एसी, स्लीपर में बैठा देते हैं। पैसेंजर से जो पैसे लेते हैं, उसमें सबका कमीशन होता है। ट्रेन में शराब खरीदना और बेचना गैरकानूनी है। रेलवे अधिनियम और कानून के नियमों को ध्यान में रखते हुए हमने शराब की बोतल नहीं खरीदी। बहाना बनाया कि अब हम खाना खा चुके हैं। इसलिए अब शराब नहीं खरीद सकते। मरुधर एक्सप्रेस में इन्वेस्टिगेशन के दौरान हमें कई और ट्रेनों में भी इसी तरह शराब की अवैध बिक्री के इनपुट मिले। इसके बाद हमने कुछ और ट्रेनों में सफर कर इनके नेटवर्क का पता लगाया। मोबाइल पर ऑर्डर करो, AC कोच में सीट पर डिलीवर हो जाएगी बोतल 8 जनवरी को हमने जयपुर से जोधपुर जाने वाली रणथंभौर एक्सप्रेस के थर्ड एसी में टिकट करवाया। जयपुर रेलवे स्टेशन से ट्रेन शाम पांच बजे रवाना हुई। ट्रेन के रवाना होने के बाद हमने एसी कोच में लगे अटेंडेंट स्टाफ से शराब की बोतल खरीदने के लिए बात की। रिपोर्टर : शराब की बोतल चाहिए, मिल जाएगी क्या? अटेंडेंट : कौन से ब्रांड की बोतल चाहिए। (करीब 15 मिनट बाद) रिपोर्टर : बोतल का अरेंजमेंट हुआ क्या? अटेंडेंट : नहीं, फुलेरा से जो बोतल लेकर आने वाला था, वो चढ़ा ही नहीं। मैंने मेरे सुपरवाइजर से भी बात कर ली। जयपुर के बाद अरेंजमेंट करना मुश्किल होता है। चाय, समोसे बेचने वाले ट्रेन में चढ़ते हैं तो उन्हें हम बोल देते हैं, वो बोतल लेकर आ जाते हैं। अभी कोई मिल नहीं रहा है। रिपोर्टर : मुझे फिर कभी शराब की बोतल चाहिए तो आपको कब बोलना है। अटेंडेंट : मेरा नाम विजयपाल सिंह है, आप मेरा मोबाइल नंबर सेव कर लो। जब भी जयपुर से ट्रेन में चढ़ो पहले मुझे फोन कर देना। इंदौर से आते समय ट्रेन सवाईमाधोपुर में करीब 20 से 25 मिनट रुकती है। वहां से आपके लिए बैग में बोतल लेकर आ जाएंगे। रिपोर्टर : तो आप जयपुर से ही करवा देते, वहां भी तो बोतल मिलती होगी? अटेंडेंट : जयपुर में ट्रेन 10 मिनट ही रुकती है। अगली बार ट्रेन में चढ़ो तो उससे पहले फोन कर देना। माल तैयार मिलेगा। चिप्स-बिस्किट बेचने वाले भी डील को हो गए तैयार ट्रेन में केवल रेलवे स्टाफ ही नहीं, गुटखा-चाय-समोसा बेचने वाले भी इसी नेटवर्क का हिस्सा है। शाम 5 बजे जोधपुर रेलवे स्टेशन से ट्रेन रवाना हुई। हम कोच नंबर बीई-1 में थे। समोसे और चिप्स बेचने वाले एक शख्स से हमने शराब की बोतल अरेंज करने को लेकर डील की। बातचीत के अंश…. रिपोर्टर : बोतल मिल जाएगी क्या? वेंडर : अब तो बहुत लेट हो गया…कौन सी ब्रांड चाहिए? रिपोर्टर : कोई भी ब्रांड की हो। (हमारा मकसद केवल नेटवर्क की पड़ताल करना था, इसलिए हमने केवल डील की, न शराब खरीदी और न ही किसी प्रकार का लेनदेन किया।) सीट नंबर बताओ, चलती ट्रेन में हाजिर कर देंगे बोतल रणथंभौर एक्सप्रेस (जोधपुर टु इंदौर) में हमने जोधपुर रेलवे स्टेशन से बोर्डिंग ली। करीब 4.50 बजे ट्रेन के थर्ड-एसी कोच बी-2 में चढ़े। हमें जयपुर तक सफर करना था। हमने कोच के अटेंडेंट को आने का इशारा किया। अटेंडेंट पास आया तो हमने शराब की बोतल की व्यवस्था के बारे में पूछा। उसने ब्रांड पूछा और कुछ देर में ही अपडेट करने को कहा। बातचीत के अंश…. रिपोर्टर : शराब की बोतल मिल जाएगी क्या? अटेंडेंट : कौन सा ब्रांड चाहिए? रिपोर्टर : कोई भी ब्रांड की करवा दो। 5-6 मिनट बाद अटेंडेंट लौटकर आया और कुछ ब्रांड के नाम और कीमत बताई। उसने दावा किया कि 10 बजे के करीब ट्रेन फुलेरा जंक्शन पर रुकेगी, वहां माल उपलब्ध हो जाएगा। नियम : ट्रेन में नहीं ले जा सकते एक बूंद भी शराब, बेचने-रखने पर हो सकती है जेल ट्रेन में सफर करते समय शराब की बोतल अपने साथ ले जाना भी गैरकानूनी है। अगर सफर करते समय आपके पास शराब मिल जाती है तो रेलवे एक्ट के तहत कार्रवाई हो सकती है। रेलवे स्टेशन परिसर या ट्रेन में शराब पीने पर भी पाबंदी है। ट्रेन के प्लेटफॉर्म या ट्रेन में शराब पीने पर रेलवे एक्ट की धारा 145 और भारतीय न्याय संहिता की धारा 292 के तहत एक हजार रुपए जुर्माना या 6 महीने जेल की सजा हो सकती है। वहीं ट्रेन में शराब पीकर सफर करने और ट्रेन में शराब पीने पर बीएनएस-151 के तहत गिरफ्तारी भी हो सकती है। अटेंडेंट : यात्रियों की मदद का जिम्मा, एक्स्ट्रा कमाई के लिए बेचते हैं शराब भारतीय रेलवे के अनुसार ट्रेन के एसी कोच में यात्रियों की मदद और सुविधा के लिए अटेंडेंट ड्यूटी पर रहते हैं। अटेंडेंट रेलवे के स्थायी कर्मचारी नहीं होते। रेलवे टेंडर निकालकर फर्म के जरिए इनकी भर्ती करता है। एक एसी कोच में दो अटेंडेंट होते हैं। यात्रियों की मदद के लिए अटेंडेंट पूरे सफर तक ड्यूटी पर रहते हैं। इनका काम यात्रियों के लिए कंबल, चादर, तकिए की व्यवस्था करना, कोच में साफ-सफाई की निगरानी करना, किसी यात्री को जरूरत पड़ने पर उसकी मदद करना होता है। हर ट्रेन में अलग-अलग अटेंडेंट को लगाया जाता है। कई अटेंडेंट एक्स्ट्रा पैसा कमाने के लालच में यात्रियों को शराब भी बेचते हैं। उत्तर पश्चिम रेलवे के सीनियर सीपीआरओ शशि किरण से सवाल-जवाब
सवाल : ट्रेन के AC कोच के अटेंडेंट स्टाफ यात्रियों को शराब बेच रहे हैं?
जवाब : यह बिल्कुल गैरकानूनी है, ट्रेन में शराब लाना और बेचना दोनों ही अपराध है।
सवाल : हमने एक स्टिंग किया, इसमें अटेंडेंट से शराब की डिमांड की तो वो शराब दोगुने दाम में देने को तैयार हो गया?
जवाब : आप हमें सारे एविडेंस भेजें, हम उनके खिलाफ कार्रवाई करेंगे।
सवाल : ट्रेन में शराब बेचने पर कौनसे नियम के तहत क्या कार्रवाई होती है?
जवाब : पहले आप हमें एविडेंस भेजिए, हम उस हिसाब से देखकर आपको बताएंगे और कार्रवाई भी करेंगे। —————————- इन्वेस्टिगेशन की ये खबरें भी पढ़िए… SMS अस्पताल में दलाल गैंग, पैसे दो तो तुरंत MRI:रिपोर्टर बने मरीज, न चेकअप, न लाइन में लगे, 3 हजार लेकर 30 मिनट में जांच प्रदेश के सबसे बड़े SMS अस्पताल में मुफ्त होने वाली एमआरआई-सीटी स्कैन जैसी जांचों के लिए दलाल पैसे वसूल रहे हैं। न डॉक्टर के पास जाने की जरूरत न लाइन में लगने का झंझट। दलालों को मुंहमांगा पैसा दो, आधे घंटे में नंबर आ जाएगा…(CLICK कर पूरा पढ़ें) भास्कर के कैमरे पर टैंकर से पेट्रोल चुराने वाले लुटेरे:भर देते हैं पानी-केरोसिन, असली पेट्रोल-डीजल किराणा की दुकानों पर बेच देते हैं राजस्थान में गैंग टैंकरों से पेट्रोल-डीजल चुरा रही हैं। ऑयल डिपो से रवाना होने के बाद पंप पर पहुंचने से पहले गैंग के बदमाश गैरेज, झाड़ियों या सुनसान रास्तों पर ड्राइवरों की मिलीभगत से महज 15-20 मिनट में हजारों लीटर पेट्रोल-डीजल चुरा लेते हैं…(CLICK कर पूरा पढ़ें)


