शैलेश लोढ़ा के नाटक माय डैड्स गर्लफ्रेंड ने बटोरी तालियां:अतुल सत्य कौशिक बोले- बात वहां बिगड़ती है जहां एक्टर्स या डायरेक्टर्स के बीच ईगो आ जाए

जवाहर कला केंद्र और राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में चल रहे रंग राजस्थान थिएटर फेस्टिवल के छठे दिन नाटकों और रंगमंच संवादों की बहार रही। शैलेश लोढ़ा अभिनीत नाटक ‘माय डैड्स गर्लफ्रेंड’ का भव्य मंचन हुआ, जिसने दर्शकों को भावनाओं और रिश्तों की उलझनों से जोड़ा। यह महोत्सव कला एवं संस्कृति विभाग, राजस्थान पर्यटन विभाग, राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर, और जवाहर कला केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। जयपुर की प्रतिष्ठित रंगमंच संस्था ‘रंग मस्ताने’ इस महोत्सव की मेजबानी कर रही है। ‘माय डैड्स गर्लफ्रेंड’ – रिश्तों की उलझनों की कहानी राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में शाम 7 बजे रंगमंच निर्देशक अतुल सत्य कौशिक के निर्देशन में नाटक ‘माय डैड्स गर्लफ्रेंड’ का मंचन किया गया। इस नाटक में मशहूर अभिनेता और कवि शैलेश लोढ़ा मुख्य भूमिका में नजर आए। नाटक एक सफल लेखक, वक्ता और प्रोफेसर शैलेश के इर्द-गिर्द घूमता है, जो अपने करियर में तो सफल है, लेकिन अपनी पत्नी और बेटी दीया से भावनात्मक रूप से जुड़ने के लिए संघर्ष करता है। जब वह अपनी बेटी के साथ समय बिताने के लिए उसके पास रहने जाता है, तो उसकी मुलाकात उसकी पुरानी प्रशंसक अवनि से होती है। अवनि, जो शैलेश की अनुयायी रही है, धीरे-धीरे उसके प्रति आकर्षित हो जाती है। इस प्रेम त्रिकोण में फंसा शैलेश बेटी से फिर से जुड़ने और अवनि के ध्यान के बीच उलझा हुआ महसूस करता है। इस नाटक में शैलेश लोढ़ा के साथ मेघा माथुर, अनुमेहा जैन और अमन वाजपेई ने दमदार अभिनय किया। सफलता के लिए वर्तमान को जानना जरूरी महोत्सव के छठे दिन दोपहर 12 बजे अलंकार गैलरी में अतुल सत्य कौशिक और उनके अभिनेताओं के साथ एक संवाद सत्र हुआ। इस दौरान उन्होंने बताया कि अभिनेता और निर्देशक के बीच ‘ईगो’ आ जाए तो नाटक का संतुलन बिगड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि एक ही निर्देशक के साथ लंबे समय तक काम करना अभिनेता की ग्रोथ रोक सकता है। इस संवाद सत्र का संचालन सिराज अहमद भाटी ने किया। ‘गवाड़ी’ – व्यक्ति से व्यक्तिगत होने का सफर दोपहर 3 बजे कृष्णायन सभागार में आशीष देव चारण के निर्देशन में नाटक ‘गवाड़ी’ का मंचन हुआ। यह नाटक चार मित्रों की कहानी दिखाता है, जो ग्रामीण परिवेश में खेलों और घटनाओं के माध्यम से व्यक्ति से व्यक्तिगत होने की यात्रा को दर्शाते हैं। अंत में यह नाटक अकेलेपन और सामाजिक दूरी की ओर बढ़ते समाज की ओर इशारा करता है। ‘ढाई आखर प्रेम’ – प्रेम आसान नहीं होता शाम 5 बजे रंगायन सभागार में रुचि भार्गव द्वारा निर्देशित नाटक ‘ढाई आखर प्रेम’ का मंचन हुआ। यह नाटक लैला-मजनू, शिरीन-फरहाद और सोहिनी-महिवाल की प्रेम कहानियों को वर्तमान प्रेम से जोड़ता है। हास्य-व्यंग्य के माध्यम से यह दिखाता है कि प्रेम में त्याग और समझ की आवश्यकता होती है।

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